सुकमा। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के जिस पूवर्ती गांव में कभी नक्सलवाद का खौफ था, वहां इस बार दिवाली का त्योहार खुशियों और उत्साह के साथ मनाया गया।
गांव में पहली बार पुलिस जवानों और ग्रामीणों ने मिलकर दीपोत्सव मनाया। शाम होते ही पटाखों की गूंज सुनाई दी और दीपों की रोशनी से बस्ती जगमगा उठी। सुकमा पुलिस की सामुदायिक पहल ‘निवा दुवड़ ते’ के तहत यह आयोजन किया गया।
महिलाओं को साड़ी, पुरुषों को लुंगी और बच्चों को मिठाई
पुलिस अधीक्षक मयंक गुर्जर के निर्देशन और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मनोज तिर्की के मार्गदर्शन में कार्यक्रम हुआ। इसमें एसडीओपी जगरगुंडा प्रभात पटेल और थाना प्रभारी परशुराम पैकरा मौजूद रहे। ग्रामीणों, महिलाओं, बच्चों, आत्मसमर्पित नक्सलियों के साथ सुकमा पुलिस और डीआरजी के जवानों ने भी हिस्सा लिया।
इस दौरान पुलिस की ओर से गांव की महिलाओं को साड़ियां और पुरुषों को पारंपरिक लुंगी भेंट की गई। बच्चों को मिठाई के पैकेट बांटे गए। उनके मनोरंजन के लिए मिकी माउस झूले की व्यवस्था भी की गई। बच्चों ने झूले का आनंद लिया। शाम को गांव के मुख्य चौराहे पर आतिशबाजी हुई।
ग्रामीणों को सुरक्षा और विकास का भरोसा
कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधिकारियों ने ग्रामीणों से बातचीत की और क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और विकास जारी रखने का भरोसा दिलाया। ग्रामीणों ने पुलिस की इस पहल की सराहना की।
नक्सल प्रभाव से मुक्त होने के बाद पूवर्ती में पुलिस और ग्रामीणों का यह संयुक्त आयोजन क्षेत्र में बदलते माहौल और आपसी विश्वास की नई तस्वीर पेश करता नजर आया। पुलिस ने ग्रामीणों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने और क्षेत्र में स्थायी शांति बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।
