पश्चिम एशिया में पिछले कुछ महीनों से जारी भीषण युद्ध अब सुलझता हुआ नजर आ रहा है, लेकिन अब ईरान के भीतर ही अमेरिका के साथ होने वाले संभावित शांति समझौते के खिलाफ बगावत के सुर फूटने लगे हैं। ईरान के कट्टरपंथी नागरिक इस ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम’ डील में मुख्य वार्ताकार की भूमिका निभा रहे विदेश मंत्री अब्बास अराघची और सांसद गालिबाफ के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं।
ईरान के कई शहरों में इन दोनों नेताओं के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई है। यह विरोध प्रदर्शन ऐसे समय में हो रहे हैं जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस शांति समझौते को लेकर लगातार बड़े दावे कर रहे हैं। ट्रंप ने अपने 80वें जन्मदिन के मौके पर दावा किया है कि इस डील पर रविवार को हस्ताक्षर हो सकते हैं, हालांकि ईरान ने इतनी जल्दबाजी से इनकार किया है।
मसहद शहर में लगे ‘अराघची इस्तीफा दो’ के नारे
एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक, इस शांति समझौते को लेकर ईरान पूरी तरह से दो धड़ों में बंट गया है। एक पक्ष जहां शांति और समझौते के लिए राजी है, वहीं दूसरा कट्टरपंथी गुट युद्ध में शहीद हुए सुप्रीम लीडर अली खामेनेई और अन्य साथियों की मौत का बदला चाहता है।
शनिवार को जब विदेश मंत्री अराघची मसहद शहर में एक सम्मेलन में हिस्सा ले रहे थे, उसी दौरान सैकड़ों की संख्या में लोगों ने उनके खिलाफ उग्र प्रदर्शन शुरू कर दिया।
- ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, प्रदर्शनकारियों में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल थीं।
- इन महिलाओं ने काले रंग की चादरें पहनी हुई थीं और लाल झंडे लेकर नारेबाजी कर रही थीं।
- वायरल हो रहे वीडियो में प्रदर्शनकारी ‘डेथ टू अराघची’, ‘अराघची शर्म करो’, ‘झुकना बंद करो’ और ‘अराघची इस्तीफा दो’ जैसे नारे लगाते हुए सुने जा सकते हैं।
क्यों भड़क रहा है ईरानियों का गुस्सा?
ईरान में शांति समझौते को लेकर लगातार बढ़ता यह गुस्सा मुख्य रूप से इन कारणों पर आधारित है:
- शहीदों का बदला: कट्टरपंथियों का मानना है कि जब तक सुप्रीम लीडर और अन्य नागरिकों की शहादत का बदला नहीं लिया जाता, तब तक अमेरिका से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।
- अमेरिकी शर्तें नामंजूर: प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि जब युद्ध हो ही चुका है और अमेरिका खुद समझौते के लिए तैयार हुआ है, तो फिर ट्रंप की शर्तों के आधार पर झुककर समझौता करने की क्या जरूरत है।
- होर्मुज पर नियंत्रण खोने का डर: लोगों का मानना है कि अराघची और गालिबाफ जिस समझौते (इस्लामाबाद मेमोरेंडम) को स्वीकार करने की तैयारी कर रहे हैं, वह ईरान के राष्ट्रीय हितों के खिलाफ है और इससे ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ पर ईरान की संप्रभु पकड़ कमजोर हो सकती है।
मध्यस्थता कर रहा पाकिस्तान, जल्द हो सकती है डील
भले ही ईरान की सड़कों पर प्रदर्शनकारी अपने विदेश मंत्री पर धोखेबाजी का आरोप लगा रहे हों, लेकिन अराघची का दावा है कि वे मजबूती से ईरान के पक्ष में ही बातचीत कर रहे हैं। गौरतलब है कि इस शांति समझौते में पाकिस्तान मध्यस्थ की अहम भूमिका निभा रहा है। पाकिस्तान की ओर से भी यह दावा किया गया है कि दोनों देशों के बीच शांति समझौते के अंतिम मसौदे पर आम राय बन रही है और जल्द ही इस ऐतिहासिक समझौते पर मुहर लग सकती है।
