इसरो ने लॉन्च किया NVS-03 सैटेलाइट, सीमा से 1500 किमी आगे तक मिलेगी नेविगेशन सुविधा

कारगिल युद्ध के बाद शुरू हुई थी स्वदेशी सिस्टम की तैयारी; सेना को मिलेगी सटीक लोकेशन और टाइमिंग की जानकारी, स्मार्टफोन-वाहनों में भी बढ़ेगा NavIC का इस्तेमाल

दिल्ली। भारत ने अपनी सैन्य और रणनीतिक क्षमता मजबूत करने की दिशा में एक और कदम उठाया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने शुक्रवार रात नेविगेशन सैटेलाइट NVS-03 का सफल प्रक्षेपण किया। इससे भारत की स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली NavIC को मजबूती मिलेगी। यह प्रणाली देश की सीमाओं से करीब 1500 किलोमीटर आगे तक सटीक लोकेशन और नेविगेशन सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए तैयार की गई है। इसका फायदा सेना के साथ नागरिकों को भी मिलेगा।

श्रीहरिकोटा से रात 11:51 बजे लॉन्च हुआ सैटेलाइट

इसरो ने 30 अक्टूबर की रात 11 बजकर 51 मिनट पर आंध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से GSLV-F18 रॉकेट लॉन्च किया। करीब 20 मिनट की उड़ान के बाद 2,232 किलोग्राम वजनी NVS-03 को जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (GTO) में स्थापित किया गया। यह GSLV की 20वीं उड़ान थी।

इसरो प्रमुख डॉ. वी. नारायणन ने मिशन की सफलता की घोषणा की। NVS-03 दूसरी पीढ़ी की NavIC सैटेलाइट सीरीज का तीसरा उपग्रह है। फिलहाल इसे निर्धारित परिचालन कक्षा में पहुंचाने के लिए ऑर्बिट रेजिंग की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

कारगिल युद्ध में महसूस हुई थी अपने GPS की जरूरत

भारत की स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली की जरूरत 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान महसूस हुई थी। उस समय भारतीय सेना को दुर्गम पहाड़ी इलाकों में सटीक लोकेशन और सैन्य गतिविधियों के लिए GPS की जरूरत थी। भारत ने अमेरिका से सैन्य स्तर का GPS डेटा मांगा था, लेकिन अमेरिका ने इसे देने से इनकार कर दिया।

इसके बाद भारत को एहसास हुआ कि रक्षा और सुरक्षा के मामलों में किसी दूसरे देश की नेविगेशन प्रणाली पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है। इसी जरूरत के चलते स्वदेशी क्षेत्रीय नेविगेशन प्रणाली IRNSS विकसित करने की प्रक्रिया शुरू हुई, जिसे बाद में NavIC नाम दिया गया।

दुश्मन की लोकेशन बताने वाला रडार नहीं है NavIC

NavIC यानी Navigation with Indian Constellation भारत की अपनी सैटेलाइट नेविगेशन प्रणाली है। यह भारत की मुख्य भूमि और सीमाओं से करीब 1500 किलोमीटर आगे तक लोकेशन, नेविगेशन और सटीक समय की जानकारी उपलब्ध करा सकती है।

इसका उपयोग सेना और सुरक्षा एजेंसियां अपनी रणनीतिक गतिविधियों, परिवहन और लोकेशन संबंधी जरूरतों में कर सकती हैं। हालांकि, NavIC दुश्मन की लोकेशन पता लगाने वाला रडार या निगरानी प्रणाली नहीं है। इसका मुख्य काम सटीक पोजिशनिंग और टाइमिंग सेवाएं देना है।

स्वदेशी परमाणु घड़ी और L1 सिग्नल खासियत

NVS-03 में स्वदेशी परमाणु घड़ी (Atomic Clock) लगाई गई है। नेविगेशन सिस्टम में सटीक समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। सैटेलाइट से मिलने वाले सिग्नल के आधार पर ही किसी स्थान की स्थिति निर्धारित की जाती है।

इसमें L1 फ्रीक्वेंसी सिग्नल भी जोड़ा गया है। इससे NavIC की आधुनिक नेविगेशन रिसीवर और उपभोक्ता उपकरणों के साथ अनुकूलता बढ़ेगी। भविष्य में स्मार्टफोन, वाहनों और अन्य उपकरणों में भारतीय नेविगेशन प्रणाली का इस्तेमाल आसान हो सकता है।

NVS-02 की तकनीकी समस्या के बाद नई सफलता

जनवरी 2025 में लॉन्च किया गया NVS-02 सैटेलाइट तकनीकी समस्या के कारण अपनी निर्धारित परिचालन कक्षा तक नहीं पहुंच पाया था। उसके पायरो वाल्व के इलेक्ट्रिकल एक्टिवेशन में दिक्कत आई थी, जिससे सैटेलाइट की कक्षा बढ़ाने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।

NVS-03 के बाद NVS-04 और NVS-05 भी NavIC की दूसरी पीढ़ी को मजबूत करने में भूमिका निभाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसरो के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को सफल प्रक्षेपण की बधाई देते हुए इसे स्वदेशी तकनीक और आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।