37 साल पुराना आदेश रद्द; 11 एकड़ जमीन निजी व्यक्ति के नाम से सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज करने का निर्देश
दिल्ली। ओडिशा के प्रसिद्ध कोणार्क सूर्य मंदिर के पास स्थित करीब 110 करोड़ रुपए की 11 एकड़ जमीन राज्य सरकार के नाम वापस दर्ज की जाएगी। राजस्व बोर्ड ने जमीन के मालिकाना हक से जुड़े 37 साल पुराने आदेश को रद्द करते हुए यह निर्देश दिया है। इसके बाद विवादित जमीन को दोबारा सरकारी खाते में दर्ज करने का रास्ता साफ हो गया है।
यह फैसला पुरी के जिला कलेक्टर की याचिका पर सुनाया गया। विवादित जमीन पहले सरकारी रिकॉर्ड में खाली जमीन के रूप में दर्ज थी। हालांकि, 1989 में इसे एक निजी व्यक्ति के नाम पर दर्ज कर दिया गया था। संबंधित व्यक्ति ने जमीन पर अपना दावा पुराने हस्तलिखित आवंटन दस्तावेजों के आधार पर पेश किया था।
कब्जा और लगान भरना मालिकाना हक का प्रमाण नहीं
राजस्व बोर्ड ने मामले की सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि किसी जमीन पर लंबे समय तक कब्जा बनाए रखना, वहां खेती करना या नियमित रूप से लगान भरना अपने आप में कानूनी मालिकाना हक साबित नहीं करता।
बोर्ड ने पुराने आदेश को रद्द करते हुए स्थानीय राजस्व अधिकारियों को जमीन का नामांतरण सरकारी खाते में करने का निर्देश दिया है। इस फैसले के बाद करीब 11 एकड़ जमीन का स्वामित्व राज्य सरकार के नाम दर्ज किया जाएगा।
सूर्य मंदिर के पास होने से जमीन की अहमियत
कोणार्क सूर्य मंदिर ओडिशा के प्रमुख ऐतिहासिक और पर्यटन स्थलों में शामिल है। मंदिर के आसपास की जमीन का मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि विवादित भूखंड का अनुमानित मूल्य करीब 110 करोड़ रुपए बताया गया है।
राजस्व बोर्ड के आदेश के अनुसार, जमीन के पुराने रिकॉर्ड में किए गए बदलाव की समीक्षा के बाद उसे फिर से सरकारी खाते में दर्ज किया जाना है। यह मामला जमीन के स्वामित्व से जुड़े विवादों में राजस्व रिकॉर्ड और वैध दस्तावेजों की अहमियत को भी रेखांकित करता है।
