Amita Shrivas Mount Everest:रायपुर। दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट (Mount Everest) को फतह कर छत्तीसगढ़ का नाम रोशन करने वाली पर्वतारोही अमिता श्रीवास (Amita Shrivas) के स्वास्थ्य को लेकर राज्य सरकार ने बड़ी पहल की है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय (Chief Minister Vishnu Deo Sai) ने स्पष्ट किया है कि एवरेस्ट विजेता अमिता के स्वास्थ्य की पूरी निगरानी की जा रही है और राज्य सरकार उनकी हर स्थिति को लेकर पूरी तरह सजग (Vigilant) है। जनसंपर्क विभाग (DPRCG) द्वारा जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार, पर्वतारोहण के बाद होने वाली स्वास्थ्य चुनौतियों को देखते हुए सरकार अमिता के संपर्क में है।
9 अप्रैल को एवरेस्ट फतह के लिए निकली थीं अमिता
जांजगीर-चांपा जिले की रहने वाली और पेशे से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अमिता श्रीवास 9 अप्रैल 2026 को काठमांडू से अपने माउंट एवरेस्ट मिशन के लिए रवाना हुई थीं।
- मुख्यमंत्री से की थी मुलाकात: रवाना होने से पहले 6 अप्रैल को अमिता ने मुख्यमंत्री निवास में सीएम विष्णु देव साय से मुलाकात की थी, जहां सीएम ने उन्हें तिरंगा सौंपकर शुभकामनाएं दी थीं।
- कठिन चुनौती और फतह: माइनस तापमान और खतरनाक बर्फीली हवाओं के बीच एवरेस्ट के शिखर पर पहुंचने के बाद, वापसी के दौरान पर्वतारोहियों को कई तरह की शारीरिक चुनौतियों और स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसी के मद्देनजर सरकार उनके स्वास्थ्य की निरंतर मॉनिटरिंग कर रही है।
‘छत्तीसगढ़ की बेटी का स्वास्थ्य हमारी प्राथमिकता’
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि अमिता केवल एक पर्वतारोही नहीं हैं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ की बेटियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। राज्य सरकार उनकी वीरता और अदम्य साहस का सम्मान करती है।
- सीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अमिता को यदि किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सहायता (Medical Assistance) की आवश्यकता होती है, तो उसे सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ उपलब्ध कराया जाए।
पहले भी रच चुकी हैं इतिहास
अमिता श्रीवास का पहाड़ों से पुराना नाता रहा है।
- वर्ष 2021 में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर उन्होंने अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो फतह की थी।
- जनवरी 2022 में उन्होंने लद्दाख स्थित 6,070 मीटर ऊंची बर्फीली यूटी कांगरी चोटी (UT Kangri) पर माइनस 31 डिग्री सेल्सियस तापमान में सफलतापूर्वक चढ़ाई की थी।
अब माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराकर उन्होंने साबित कर दिया है कि दृढ़ संकल्प के आगे कोई भी ऊंचाई असंभव नहीं है। प्रदेशवासियों को अब अपनी इस बहादुर बेटी के सकुशल राज्य वापसी का इंतजार है।
