दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को रद्द करने की मांग वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को सुनवाई होगी।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे समेत विपक्षी नेताओं और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की याचिकाएं सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हैं। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ करेगी।
विपक्षी नेताओं ने अपनी याचिकाओं में चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया, फॉर्म-6 में बदलाव और SIR से जुड़े फैसलों की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया से बड़ी संख्या में वैध मतदाता प्रभावित हुए हैं। वहीं, ओवैसी ने भी SIR प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से जुड़े मामले भी
सुप्रीम कोर्ट में जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने के मामले में दायर जनहित याचिकाओं पर भी सुनवाई हो सकती है। इसके अलावा 10 अक्टूबर को दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई और मेट्रो व सड़कें बंद किए जाने से संबंधित अवमानना याचिका का मामला भी अदालत के सामने आ सकता है।
सुप्रीम कोर्ट परिसर में विपक्षी नेताओं के पहुंचने के दौरान हुए हंगामे और नारेबाजी को लेकर भी याचिका दाखिल की गई है। डॉ. आंबेडकर सोसायटी फॉर थॉट्स, एक्शंस एंड कॉन्शसनेस (दस्तक) ने राहुल गांधी को पत्र लिखकर इस घटनाक्रम पर सार्वजनिक माफी की मांग की है।
कांग्रेस ने जताया सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा
सुनवाई से पहले कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने SIR के तहत बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम काटे जाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को संविधान और सुप्रीम कोर्ट पर पूरा भरोसा है। पार्टी को उम्मीद है कि अदालत का फैसला लोकतंत्र और मतदान के अधिकारों की रक्षा करेगा।
तिवारी ने यह भी सवाल उठाया कि यदि चुनाव के बाद फैसला आता है, तो पहले ही मतदान कर चुके राज्यों में प्रभावित मतदाताओं के अधिकारों की भरपाई कैसे होगी।
