नई दिल्ली। IIT बॉम्बे परीक्षा में नकल या अनुचित साधनों के इस्तेमाल के आरोप में छात्रों पर सीधे अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के बजाय पहले उनका पक्ष सुनने की व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर रहा है। संस्थान ने इसके लिए नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) का ड्राफ्ट तैयार किया है। यह कदम बीटेक छात्र साहिल वाकोडे की 18 सितंबर को आत्महत्या के बाद उठाया गया है।
नई SOP पर इस सप्ताह होने वाली आपातकालीन सीनेट बैठक में फैसला लिया जा सकता है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत परीक्षा में गड़बड़ी के संदेह पर कार्रवाई से पहले छात्र को मेंटर या विभागाध्यक्ष से बात करने और अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा। परीक्षा कदाचार के मामलों में सजा के प्रावधानों की भी समीक्षा की गई है।
इन्विजिलेटर के लिए स्पष्ट होंगे नियम
नई व्यवस्था में परीक्षा निरीक्षकों के लिए भी अलग और स्पष्ट दिशा-निर्देश तैयार किए जा रहे हैं। संदिग्ध मामले सामने आने पर परीक्षा हॉल में क्या कार्रवाई करनी है और किन बातों से बचना है, इसे SOP में तय किया जाएगा। घटना के दौरान जरूरी रिकॉर्डिंग और दस्तावेजी प्रक्रिया को भी मानकीकृत किया जाएगा, ताकि छात्रों पर अनुचित दबाव न पड़े।
इसके अलावा उत्तर-पुस्तिका के पहले पेज पर परीक्षा कदाचार से जुड़े नियम और संभावित सजा सरल भाषा में लिखे जाने का प्रस्ताव है। इससे छात्रों को परीक्षा से पहले नियमों और उनके परिणामों की जानकारी रहेगी।
वेलनेस और छात्रों की भागीदारी पर जोर
संस्थान अनुशासनात्मक समितियों और SOP तैयार करने वाली प्रक्रियाओं में छात्रों की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में भी काम कर रहा है। मानसिक स्वास्थ्य और वेलनेस के लिए कैंपस सपोर्ट सिस्टम मजबूत करने तथा नई जिम्मेदारियां तय करने की तैयारी है।
शिक्षा विशेषज्ञ महेश्वर पेरी ने कहा कि नकल जैसे मामलों में कार्रवाई जरूरी है, लेकिन प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए जिसमें छात्र को सुधार का अवसर मिले। उन्होंने शिक्षण संस्थानों में स्पष्ट और संवेदनशील SOP लागू करने की जरूरत बताई।
