अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी सैन्य तनाव के बीच एक बेहद बड़ी कूटनीतिक प्रगति की खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि अगले दो दिनों के भीतर ईरान के साथ एक ऐतिहासिक समझौता होने जा रहा है, जिससे दोनों देशों के बीच की जंग समाप्त हो जाएगी। कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता से तैयार हो रहे इस संभावित समझौते को लेकर एक मीडिया रिपोर्ट में बेहद चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। आइए जानते हैं क्या हैं इस US Iran Islamabad Agreement Details के मुख्य बिंदु।
60 दिनों का सीजफायर और लेबनान पर बड़ा फैसला
मीडिया आउटलेट ‘एक्सियोस’ ने वार्ता में शामिल एक वरिष्ठ सूत्र के हवाले से इस प्रस्तावित समझौते (MoU) के मुख्य मसौदे की जानकारी साझा की है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, समझौते के तहत सबसे पहले युद्धविराम (सीजफायर) को अगले 60 दिनों के लिए बढ़ाया जाएगा, जिसमें लेबनान को भी शामिल किया गया है। यानी इस अवधि में लेबनान पर भी कोई अमेरिकी या सहयोगी हमला नहीं होगा। इन 60 दिनों का उपयोग अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु मुद्दे पर मुख्य रूप से बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए किया जाएगा।
परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम भंडार पर बनी सहमति
प्रस्तावित ‘इस्लामाबाद समझौते’ में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बेहद कड़े प्रावधान शामिल किए गए हैं। ईरान इस बात पर अपनी लिखित सहमति देगा कि वह भविष्य में कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करेगा। इसके साथ ही, ईरान के एनरिच्ड यूरेनियम (संवर्धित यूरेनियम) के विवादित भंडार को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस बात पर सहमत हुए हैं कि देश के भीतर ही अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम को कम संवर्धन वाले स्तर पर बदला जाएगा। यह पूरी प्रक्रिया संयुक्त राष्ट्र (UN) की परमाणु एजेंसी की कड़ी निगरानी में संपन्न होगी।
होर्मुज जलडमरूमध्य और फ्रीज संपत्तियों पर क्या है डील?
इस समझौते पर हस्ताक्षर होते ही रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को वाणिज्यिक जहाजों के लिए तुरंत खोल दिया जाएगा और जहाजों से कोई टोल नहीं वसूला जाएगा। इसके बदले अमेरिका अपनी समुद्री नाकेबंदी हटाएगा और ईरान को 60 दिनों के लिए अस्थायी तौर पर तेल बेचने की छूट मिलेगी। जहां तक विदेशों में जब्त ईरान की अरबों डॉलर की संपत्ति (फ्रोजेन एसेट्स) का सवाल है, ईरान इसे तुरंत जारी करने की मांग कर रहा है, जबकि अमेरिका का रुख है कि यह पैसा ईरान के व्यवहार और समझौते के पालन के आधार पर किस्तों में जारी किया जाएगा।
