पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) में अब तक की सबसे बड़ी ऐतिहासिक फूट पूरी तरह तय हो चुकी है। राज्य विधानसभा में 80 में से 58 विधायकों के विद्रोह के बाद अब लोकसभा के 19 बागी सांसदों की एक चिट्ठी शुक्रवार को सार्वजनिक हो गई है। न्यूज एजेंसी एएनआई (ANI) के मुताबिक, यह पत्र 18 मई को ही लोकसभा स्पीकर को भेजकर संसद में एक अलग गुट बनाने की मांग की गई थी, जिससे साफ है कि चुनावी नतीजों के महज 14 दिन बाद ही यह आंतरिक विद्रोह सुलग चुका था। इस भीषण TMC Crisis West Bengal Politics ने राज्य की सियासत को पूरी तरह से हिला कर रख दिया है।
लोकसभा और विधानसभा दोनों जगह बागी गुट के पास दो-तिहाई बहुमत
देश के कड़े दल-बदल विरोधी कानून (10वीं अनुसूची) के तहत संसद या विधानसभा में किसी भी अलग गुट को मान्यता तभी मिलती है, जब पार्टी के कम से कम दो-तिहाई सदस्य उसके साथ हों। तृणमूल कांग्रेस के इस पूरे घटनाक्रम में बागी गुट ने इस नंबर गेम को बेहद मजबूती से हासिल कर लिया है। पश्चिम बंगाल विधानसभा में ममता बनर्जी के कुल 80 विधायकों में से 58 विधायक पहले ही अलग हो चुके हैं, जिन्हें विधानसभा अध्यक्ष ने मान्यता भी दे दी है। वहीं, लोकसभा में भी कुल 28 सांसदों में से 19 सांसद खुलकर बगावत का बिगुल फूंक चुके हैं, जो कानूनी रूप से दो-तिहाई से अधिक है।
महाराष्ट्र जैसी सियासी पटकथा, उद्धव ठाकरे जैसी स्थिति में ममता बनर्जी
पश्चिम बंगाल का यह ताजा घटनाक्रम ठीक चार साल पहले साल 2022 में महाराष्ट्र में हुए शिवसेना विवाद की याद दिलाता है। उस समय एकनाथ शिंदे ने 40 विधायकों के साथ तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के खिलाफ बगावत की थी, जिसके बाद अंततः चुनाव आयोग ने शिंदे गुट को ही असली शिवसेना माना था। वर्तमान में इस बड़ी टूट के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खेमे में राजनीतिक जमीन खिसकती नजर आ रही है। अब लोकसभा में ममता बनर्जी के पास सिर्फ 8 सांसद, राज्यसभा में 9 सांसद और विधानसभा में महज 22 विधायक ही शेष बचे हैं।
इन दिग्गज लोकसभा सांसदों के नाम आए सामने
सामने आई आधिकारिक सूची के अनुसार, बगावत करने वाले इन 19 प्रमुख लोकसभा सांसदों में यूसुफ पठान (बहरामपुर), सायोनी घोष (जादवपुर), काकोली घोष दस्तीदार (बारासात), शताब्दी रॉय (वीरभूम), सुपरस्टार दीपक अधिकारी देव (घाटाल), जून मालिया (मेदिनीपुर), और रचना बनर्जी (हुगली) जैसे कई बड़े और बेहद प्रभावशाली नाम शामिल हैं। हालांकि, इस पूरे मामले को लेकर ममता बनर्जी का खेमा आने वाले दिनों में अदालत (सुप्रीम कोर्ट) का दरवाजा खटखटा सकता है, जिससे यह कानूनी लड़ाई और दिलचस्प होने की उम्मीद है।
