रायपुर। आज के प्रतिस्पर्धी दौर में केवल शैक्षणिक डिग्री ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक कौशल भी सफलता की सबसे बड़ी कुंजी बन चुका है।
बदलती तकनीक और उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षित युवा ही बेहतर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर प्राप्त कर सकते हैं।
इसी सोच को साकार करते हुए छत्तीसगढ़ सरकार मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के माध्यम से युवाओं को आधुनिक, रोजगारोन्मुखी और उद्योगों की मांग के अनुरूप प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है।
योजना की शुरुआत से अब तक प्रदेश के 4 लाख 94 हजार 330 युवाओं को विभिन्न रोजगारपरक ट्रेडों में कौशल प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इनमें से 2 लाख 74 हजार 934 युवाओं को रोजगार से जोड़ा गया है।
वर्तमान में राज्य के 375 प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से राष्ट्रीय कौशल अर्हता फ्रेमवर्क (NSQF) के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण संचालित किया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक 9,418 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया, जिनमें से 7,528 युवाओं को रोजगार मिल चुका है।
आधुनिक तकनीकों पर विशेष फोकस
राज्य सरकार ने समय की मांग को देखते हुए पारंपरिक ट्रेडों के साथ इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) मेंटेनेंस, ड्रोन ऑपरेटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं मशीन लर्निंग (AI-ML), साइबर सुरक्षा और सूर्यमित्र जैसे आधुनिक पाठ्यक्रम शुरू किए हैं।
इसके अलावा जल वितरण संचालक (Water Distribution Operator) कोर्स के माध्यम से 2,770 युवाओं को प्रशिक्षित कर रोजगार से जोड़ने की योजना बनाई गई है।
गुणवत्ता और रोजगार दोनों पर जोर
कौशल विकास कार्यक्रम में प्रशिक्षण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए प्रशिक्षकों का टीओटी (Training of Trainers) प्रमाणन, सात दिन की अनिवार्य ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग, फेस आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति और सीसीटीवी निगरानी जैसी आधुनिक व्यवस्थाएं लागू की गई हैं।
साथ ही प्रशिक्षण संस्थानों के भुगतान को प्रशिक्षित युवाओं के रोजगार से जोड़कर परिणाम आधारित व्यवस्था विकसित की गई है।
लाईवलीहुड कॉलेज बने बदलाव के केंद्र
प्रदेश के लाईवलीहुड कॉलेज युवाओं के लिए कौशल विकास के प्रमुख केंद्र बन चुके हैं। वर्ष 2013 से अब तक यहां 68,552 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है, जिनमें 39,452 युवा रोजगार और स्वरोजगार से जुड़ चुके हैं। वहीं बस्तर संभाग के दूरस्थ क्षेत्रों में स्किल डेवलपमेंट सेंटर स्थापित कर आदिवासी युवाओं तक भी आधुनिक प्रशिक्षण पहुंचाया जा रहा है।
राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी पहचान
महिंद्रा एंड महिंद्रा, साइरोनिक्स टेक्नोलॉजी और नांदी फाउंडेशन जैसी संस्थाओं के सहयोग से उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वहीं नवा रायपुर में अत्याधुनिक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की तैयारी भी चल रही है।
वर्ष 2025-26 की इंडिया स्किल प्रतियोगिताओं में छत्तीसगढ़ के प्रतिभागियों ने 1 स्वर्ण, 2 रजत, 5 कांस्य और 4 मेडल ऑफ एक्सीलेंस सहित कुल 12 पदक जीतकर प्रदेश का गौरव बढ़ाया है।
विश्व युवा कौशल विकास दिवस पर छत्तीसगढ़ की यह उपलब्धियां बताती हैं कि कौशल विकास अब केवल प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने, रोजगार उपलब्ध कराने और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की मजबूत आधारशिला बन चुका है।
