खाद्य विभाग ने छत्तीसगढ़ के कई जिलों में राईस मिलों पर की बड़ी कार्रवाई
रायपुर: खाद्य विभाग की टीम ने आज रायपुर, धमतरी, महासमुंद और राजनांदगांव सहित अन्य जिलों में स्थित राईस मिलों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान सरकारी धान उपार्जन नियमों के उल्लंघन पर कई मिलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई।
आर.टी. राईस मिल (प्रो. प्रमोद जैन) के परिसर में हुए निरीक्षण के दौरान कस्टम मिलिंग के लिए पंजीकरण के बावजूद अनुमति एवं अनुबंध का निष्पादन न होने का मामला सामने आया। जांच में पाया गया कि मिल परिसर से शासकीय धान का उठाव नहीं किया जा रहा है। साथ ही, वहां 390 क्विंटल उसना चावल और 1200 क्विंटल धान फ्री सेल प्रयोजन के लिए मौजूद थे। यह छत्तीसगढ़ कस्टम मिलिंग चावल उपार्जन आदेश, 2016 का उल्लंघन माना गया।
खाद्य विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मिल परिसर को सील कर दिया और धान व चावल को जब्त कर लिया। इस जांच में तहसीलदार बाबूलाल कुर्रे, नायब तहसीलदार राजेंद्र चंद्राकर और सहायक खाद्य अधिकारी श्रीमती बिंदु प्रधान मौजूद थे।
महासमुंद, धमतरी और राजनांदगांव जिलों में भी कार्रवाई
खाद्य विभाग की टीम ने महासमुंद जिले में श्रीवास्तव राईस मिल, नारायण राईस मिल और माँ लक्ष्मी राईस मिल पर दबिश दी। वहीं, धमतरी जिले में आकांक्षा राईस मिल और राजनांदगांव जिले में अतुल राईस मिल का भी निरीक्षण किया गया। सभी मामलों में नियमों के उल्लंघन की जांच जारी है।
व्यापारियों में असंतोष, भय का माहौल
कार्रवाई के बाद व्यापारियों में असंतोष की लहर है। राईस मिलर्स का कहना है कि वर्तमान आर्थिक स्थिति में छापेमारी से व्यापारियों के बीच भय का माहौल पैदा हो गया है। एक व्यापारी ने कहा, “मिलर्स अपनी मेहनत का पैसा मांग रहे हैं। उनकी आर्थिक स्थिति पहले से ही खराब है, और ऐसे में छापेमारी उनके काम करने के उत्साह को कम कर रही है।”
सरकारी सख्ती पर मिलर्स का विरोध
मिलर्स ने मांग की है कि सरकार व्यापारियों को भय मुक्त माहौल दे और उनकी समस्याओं का समाधान निकालने के लिए संवाद करे। वहीं, खाद्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि सरकारी धान उपार्जन प्रक्रिया में अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
क्या बोले योगेश अग्रवाल (अध्यक्ष राईस मिलर्स एसोसिएशन)
भय मुक्त वातावरण का नारा देने वाली सरकार व्यापारियों में भय पैदा कर रही है। आज हमारे प्रदेश के पदाधिकारियों सहित पूरे प्रदेश में मिलर्स पर छापमार कार्यवाही हुई है जो ग़लत है। मिलर्स अपनी मेहनत का पैसा माँग रहा है जिसमें कोई विरोधाभास भी नहीं है। आज मिलर्स की आर्थिक हालत ख़राब है उसको पैसा मिलेगा तो वह उत्साह से काम करेगा पर छापे से प्रदेश के व्यापारियों में भय का वातावरण बन गया है जो दूर होना चाहिए।
