CG Liquor Policy:छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में शराब की बिक्री और वितरण व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार ने एक बहुत बड़ा और अहम बदलाव किया है। आबकारी विभाग ने यह निर्णय लिया है कि आने वाले कुछ ही दिनों में राज्य भर की शराब दुकानों से कांच की बोतलें (Glass Bottles) पूरी तरह से हटा ली जाएंगी। सरकार की नई नीति के तहत अब ग्राहकों को शराब केवल और केवल प्लास्टिक की बोतलों में ही बेची जाएगी। इस बड़े फैसले के पीछे सरकार ने मिलावट रोकने और सिस्टम में पारदर्शिता लाने का तर्क दिया है।
1 जून से सिर्फ प्लास्टिक की बोतलों में होगी बिक्री
राज्य के आबकारी मंत्री लखनलाल देवांगन ने इस नई नीति की विस्तार से जानकारी दी है।
- उन्होंने बताया कि 31 मई तक राज्य में संक्रमण काल (Transition Period) रहेगा। इस दौरान शराब दुकानों पर कांच और प्लास्टिक, दोनों तरह की बोतलें उपलब्ध रहेंगी।
- लेकिन 1 जून से राज्य में शराब की बिक्री पूरी तरह से सिर्फ प्लास्टिक बोतलों में ही की जाएगी।
- विभाग का मानना है कि पूरे राज्य में एक ही तरह की पैकेजिंग होने से वितरण व्यवस्था में एकरूपता (Uniformity) आएगी और स्टॉक के मिलान में आसानी होगी।
मिलावट रोकने और शुद्धता सुनिश्चित करने का दावा
शराब प्रेमियों के मन में यह सवाल उठना लाजमी है कि आखिर कांच की बोतलों को क्यों हटाया जा रहा है?
- आबकारी मंत्री का दावा है कि कांच की बोतलों के ढक्कन और सील के साथ छेड़छाड़ करना अपेक्षाकृत आसान होता है, जिससे शराब में मिलावट की शिकायतें आती रहती हैं।
- वहीं, विशेष रूप से तैयार की गई प्लास्टिक की बोतलों के इस्तेमाल से शराब में मिलावट की संभावना न के बराबर हो जाएगी।
- सरकार का उद्देश्य उपभोक्ताओं को 100 प्रतिशत शुद्ध उत्पाद उपलब्ध कराना है। इसके अलावा, कांच टूटने से होने वाले नुकसान और हादसों में भी कमी आएगी।
आबकारी मंत्री का कांग्रेस सरकार पर बड़ा हमला
इस नए फैसले की घोषणा करते हुए आबकारी मंत्री लखनलाल देवांगन ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर भी जमकर राजनीतिक निशाना साधा।
उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि वर्तमान “डबल इंजन” सरकार में भ्रष्टाचार के लिए कोई जगह नहीं है। सरकार आबकारी विभाग को पूरी तरह से पारदर्शी बनाने के लिए लगातार कड़े और ऐतिहासिक कदम उठा रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के समय शराब व्यवस्था में भारी भ्रष्टाचार हुआ था।
मंत्री ने याद दिलाया कि उस दौर में शराब दुकानों में 2-2 काउंटर चलने जैसी गंभीर अनियमितताएं सामने आई थीं, जिससे सरकारी खजाने को करोड़ों का चूना लगा था।
