नई दिल्ली. मंगलवार, 3 मार्च 2026 को इस वर्ष का पहला पूर्ण चंद्रग्रहण लगने जा रहा है। यह खगोलीय घटना विज्ञान और मान्यताओं, दोनों ही दृष्टिकोणों से अत्यधिक महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भारतीय समयानुसार इस चंद्रग्रहण की शुरुआत दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर होगी और इसका पूर्ण समापन शाम करीब 6 बजकर 48 मिनट पर होगा। इस विशेष घटना के लिए सूतक काल की शुरुआत मंगलवार सुबह 6 बजकर 20 मिनट से ही हो चुकी है। भारत के कई बड़े शहरों में यह ग्रहण दिखाई देगा, लेकिन चूंकि इसके शुरू होने के समय देश में दिन का उजाला रहेगा, इसलिए अधिकांश हिस्सों में लोग केवल चंद्रोदय के समय ही इसके अंतिम चरण का दीदार कर सकेंगे।
इस अलौकिक खगोलीय घटना से जुड़े 5 महत्वपूर्ण बिंदु इस प्रकार हैं:
- पूर्ण चंद्रग्रहण की अवधि दोपहर 3:20 बजे से शुरू होकर शाम 6:48 बजे तक रहेगी, जिसका सूतक काल सुबह से ही लग चुका है।
- भारत के पूर्वोत्तर राज्यों और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में चंद्रमा के जल्दी उदित होने के कारण वहां के लोग पूर्ण अवस्था की अंतिम झलक अधिक स्पष्टता से देख सकेंगे।
- दक्षिण भारत के क्षेत्रों, विशेषकर चेन्नई और कन्याकुमारी में यह चंद्रग्रहण आसमान में लगभग 31 मिनट तक साफ तौर पर दिखाई देगा।
- एशिया, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप में यह पूर्ण ग्रहण ‘ब्लड मून’ के रूप में देखा जा सकेगा, जहां चंद्रमा पूरी तरह से लाल नजर आएगा।
- एक खगोलीय अनुमान के अनुसार, विश्व की लगभग 40 प्रतिशत आबादी इस चंद्रग्रहण के किसी न किसी चरण को प्रत्यक्ष रूप से देखने में सक्षम होगी।
खगोल विज्ञान में गहरी रुचि रखने वाले शोधकर्ताओं और आम लोगों के लिए आसमान में होने वाली यह हलचल एक बहुत बड़ा और खास अवसर है। यह चंद्रग्रहण न केवल भारत, बल्कि एशिया के अन्य हिस्सों, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, अफ्रीका और यूरोप के कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में भी अपने विभिन्न चरणों में दृष्टिगोचर होगा। अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के आसमान में जब चंद्रमा पूरी तरह से पृथ्वी की छाया से ढक जाएगा, तब वह एक गहरे लाल रंग में चमकता हुआ प्रतीत होगा, जिसे ‘ब्लड मून’ कहा जाता है।
भारत की भौगोलिक स्थिति के कारण ग्रहण की पूर्णता का मुख्य समय दोपहर का है, इसलिए देश के अधिकांश हिस्सों में पूर्ण ग्रहण का चरम देखना संभव नहीं हो पाएगा। फिर भी, जैसे ही शाम को चंद्रमा आसमान में उदित होगा, वह आंशिक रूप से ढका हुआ दिखाई देगा, जो धीरे-धीरे अपनी सामान्य अवस्था में वापस लौटेगा। इस पूरे घटनाक्रम को बिना किसी दूरबीन या विशेष उपकरण के आसानी से देखा जा सकता है, बशर्ते संबंधित स्थानों पर आसमान पूरी तरह से साफ हो और बादल न छाए हों।
