असम चुनाव 2026: कॉटन कॉलेज के वंडर बॉय से मुख्यमंत्री तक हिमंत बिस्वा सरमा का सफर

Himanta Biswa Sarma Journey

Himanta Biswa Sarma Journey:असम की राजनीति में हिमंत बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) एक ऐसा नाम बन चुके हैं जिनकी रणनीतियों की चर्चा आज पूरे देश में होती है। गुवाहाटी के ऐतिहासिक कॉटन कॉलेज से छात्र राजनीति की शुरुआत करने वाले हिमंत अब दूसरी बार असम के मुख्यमंत्री पद की कमान संभालने जा रहे हैं। 12 मई को होने वाले उनके शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल होंगे। आइए जानते हैं असम के इस कद्दावर नेता के राजनीतिक सफर की दिलचस्प कहानी।

कॉटन कॉलेज से मिली राजनीति की असली शिक्षा

गुवाहाटी का कॉटन कॉलेज (Cotton College) पूर्वोत्तर का सबसे पुराना उच्च शिक्षण संस्थान है। इस कॉलेज का असम की राजनीति में कितना दबदबा है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राज्य के 15 मुख्यमंत्रियों में से 7 इसी कॉलेज के छात्र रहे हैं।

  • छात्रसंघ चुनाव: हिमंत बिस्वा सरमा ने अपनी राजनीति की शुरुआत यहीं से की थी। 19 साल की उम्र में उन्होंने छात्रसंघ चुनाव में महासचिव पद के लिए दावेदारी पेश की।
  • नेतृत्व क्षमता: उन्होंने राज्य के सबसे ताकतवर छात्र संगठन को हराकर अपनी नेतृत्व क्षमता का लोहा मनवाया। 1992 तक वे लगातार 3 बार इस पद पर चुने गए।

असम छात्र आंदोलन के ‘वंडर बॉय’

1 फरवरी 1969 को जोरहाट में जन्मे हिमंत को असम छात्र आंदोलन के दौरान ‘वंडर बॉय’ (Wonder Boy) के नाम से जाना जाता था।

  • बचपन से ही वे प्रफुल्ल महंत और भृगु फुकन जैसे दिग्गज नेताओं के संपर्क में आ गए थे।
  • उन्होंने इन वरिष्ठ नेताओं के साथ मंच साझा किया और अपने जोशीले भाषणों से जनता और मीडिया का ध्यान अपनी ओर खींचा।

कांग्रेस का सफर और अपने ही गुरु को दी मात

हिमंत बिस्वा सरमा ने 2001 में जालकुबारी सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा और अपने ही राजनीतिक गुरु भृगु फुकन को हरा दिया।

  • लगातार जीत: पहला चुनाव 10 हजार वोटों से जीतने वाले हिमंत का जीत का अंतर लगातार बढ़ता गया और 2021 में वे 1 लाख 1 हजार वोटों से जीते। 2001 से 2021 तक वे जालकुबारी से लगातार 5 बार विधायक चुने गए।
  • संकटमोचक की भूमिका: तरुण गोगोई की सरकार में उन्होंने वित्त, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे अहम विभाग संभाले और सरकार के लिए मुख्य रणनीतिकार की भूमिका निभाई। 2011 के विधानसभा चुनाव में उनके प्रबंधन से कांग्रेस ने 126 में से 78 सीटें जीतीं।

गोगोई से टकराव और भाजपा में प्रवेश

राजनीतिक गलियारों में माना जा रहा था कि हिमंत ही तरुण गोगोई के उत्तराधिकारी होंगे। लेकिन जब गोगोई ने अपने बेटे गौरव गोगोई को आगे बढ़ाना शुरू किया तो टकराव की स्थिति पैदा हो गई।

भाजपा का दामन: कांग्रेस छोड़ने के बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया। भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के बाद हिमंत ने पार्टी को पूर्वोत्तर में मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई और अब वे लगातार दूसरी बार असम के मुख्यमंत्री के रूप में कमान संभाल रहे हैं।

सोनिया गांधी से मुलाकात: 2014 में हिमंत ने सोनिया गांधी से मुलाकात कर अपना पक्ष रखा लेकिन सहमति नहीं बन पाई। इसके बाद उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।