TMC Supreme Court West Bengal SIR:पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 (West Bengal Elections 2026) के नतीजों के बाद राज्य की राजनीति अब देश की सबसे बड़ी अदालत की दहलीज पर पहुंच गई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने सुप्रीम कोर्ट में एक बेहद चौंकाने वाला दावा किया है। पार्टी का कहना है कि विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के तहत मतदाता सूची से नामों को हटाए जाने (Deletion) का सीधा असर कम से कम 31 सीटों के चुनाव नतीजों पर पड़ा है।
31 सीटों पर ‘वोटर डिलीशन’ का गणित
सुप्रीम कोर्ट में टीएमसी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी ने मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ के सामने कई महत्वपूर्ण आंकड़े रखे:
- जीत के अंतर से ज्यादा डिलीशन: टीएमसी ने दावा किया कि 31 ऐसी सीटें हैं जहां भाजपा (BJP) की जीत का अंतर उन वोटों की संख्या से कम था, जिन्हें SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से हटा दिया गया था।
- एक खास सीट का उदाहरण: कल्याण बनर्जी ने कोर्ट को बताया कि एक निर्वाचन क्षेत्र में उनके उम्मीदवार की हार मात्र 862 वोटों से हुई, जबकि उसी सीट पर 5,432 से ज्यादा वोट जांच के नाम पर हटा दिए गए थे।
- 32 लाख का अंतर बनाम 35 लाख अपील: पार्टी का तर्क है कि दोनों बड़ी पार्टियों के बीच कुल वोटों का अंतर करीब 32 लाख है, जबकि डिलीशन के खिलाफ अभी भी 35 लाख से ज्यादा अपीलें न्यायाधिकरणों (Tribunals) में लंबित हैं।
सुप्रीम कोर्ट का रुख और चुनाव आयोग की दलील
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए टीएमसी को औपचारिक रूप से एक अंतरिम आवेदन (Interlocutory Application – IA) दाखिल करने का निर्देश दिया है।
- सुप्रीम कोर्ट: जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि यदि जीत का अंतर डिलीट किए गए वोटों से कम है, तो यह न्यायिक जांच का विषय हो सकता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि लंबित अपीलों का निपटारा प्राथमिकता के आधार पर होना चाहिए।
- चुनाव आयोग (ECI): आयोग की ओर से पेश वकील दामा शेषाद्रि नायडू ने इन दलीलों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि चुनाव नतीजों को चुनौती देने का सही कानूनी रास्ता चुनाव याचिका (Election Petition) दाखिल करना है, न कि सीधे सुप्रीम कोर्ट में आवेदन करना।
मेनका गुरुस्वामी की चेतावनी: “न्याय मिलने में लग सकते हैं 4 साल”
वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने कोर्ट का ध्यान इस ओर खींचा कि जिस गति से अपीलीय न्यायाधिकरण काम कर रहे हैं, सभी लंबित अपीलों का निपटारा करने में कम से कम 4 साल लग सकते हैं। ऐसे में टीएमसी का पक्ष है कि जब तक इन रद्द किए गए वोटों की वैधता तय नहीं होती, तब तक चुनाव परिणामों की निष्पक्षता पर सवाल बने रहेंगे।
