अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की सत्ता में वापसी के बाद से ही मध्य पूर्व (Middle East) की भू-राजनीति में भारी उबाल आ गया है। ट्रंप की आक्रामक ‘अधिकतम दबाव’ (Maximum Pressure) की नीति का कड़ा मुकाबला करने के लिए ईरान ने अब एक व्यापक और रणनीतिक ‘Iran mega plan Trump’ (ईरान का ट्रंप के खिलाफ मेगा प्लान) तैयार कर लिया है। इस नई कूटनीतिक और सैन्य रणनीति ने वैश्विक स्तर पर सुरक्षा एजेंसियों और कूटनीतिक विचारकों की रातों की नींद उड़ा दी है।
Iran mega plan Trump: आर्थिक और सामरिक घेराबंदी की तैयारी
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स और खुफिया सूत्रों के अनुसार, यह ‘Iran mega plan Trump’ मुख्य रूप से अमेरिकी प्रतिबंधों (US Sanctions) को बेअसर करने पर केंद्रित है। ईरान अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए रूस (Russia) और चीन (China) के साथ अपने ऊर्जा और रक्षा व्यापार को अभूतपूर्व स्तर पर ले जा रहा है। इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य व्यापार में डॉलर (US Dollar) पर निर्भरता खत्म करना और ट्रंप प्रशासन के कड़े आर्थिक झटकों से खुद को पूरी तरह सुरक्षित रखना है।
क्षेत्रीय प्रॉक्सी (Proxy Network) और सैन्य विस्तार
आर्थिक मोर्चे के अलावा, ईरान अपनी सैन्य ताकत (Military Strength) और क्षेत्रीय दबदबे को भी तेजी से बढ़ा रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान लेबनान, यमन और इराक में मौजूद अपने प्रॉक्सी गुटों को और अधिक उन्नत मिसाइलें और ड्रोन मुहैया करा रहा है। इस ‘मेगा प्लान’ का एक बड़ा हिस्सा अपनी परमाणु संवर्धन (Nuclear Enrichment) गतिविधियों को ढाल बनाकर वाशिंगटन पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाना भी है।
वैश्विक सुरक्षा (Global Security) पर सीधा असर
ईरान की इस आक्रामक और सुनियोजित तैयारी के कारण मध्य पूर्व में तनाव का एक नया दौर शुरू होने की प्रबल आशंका है। यदि ट्रंप प्रशासन और ईरान के बीच यह कूटनीतिक और सैन्य टकराव बढ़ता है, तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल बाजार (Global Oil Market) और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
