छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के दुर्ग जिले से एक बेहद हैरान करने वाला और गंभीर प्रशासनिक मामला सामने आया है। इलाके में बड़े पैमाने पर चल रही अफीम की अवैध खेती (Illegal Opium Farming) का भंडाफोड़ होने के बाद राज्य सरकार ने बेहद सख्त कदम उठाया है। ताज़ा ‘Durg opium cultivation case’ (दुर्ग अफीम खेती मामला) में भारी लापरवाही बरतने और दायित्वों की अनदेखी करने के आरोप में प्रशासन ने एक स्थानीय महिला अधिकारी (Female Officer) को तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspend) कर दिया है। इस बड़ी और त्वरित कार्रवाई से पूरे प्रशासनिक महकमे और भू-माफियाओं में हड़कंप मच गया है।
Durg opium cultivation case: महिला अधिकारी पर गिरी गाज
दुर्ग जिले के कुछ ग्रामीण अंचलों में माफियाओं द्वारा गुपचुप तरीके से इस प्रतिबंधित मादक पदार्थ की खेती की जा रही थी। जब इस ‘Durg opium cultivation case’ की भनक उच्च अधिकारियों और पुलिस विभाग (Police Department) को लगी, तो पुलिस बल ने मौके पर बड़ी छापामार कार्रवाई की। जांच के दौरान यह बात स्पष्ट रूप से सामने आई कि संबंधित क्षेत्र की जिम्मेदार महिला अधिकारी ने इस अवैध गतिविधि को रोकने में घोर लापरवाही बरती। उनकी इस संदिग्ध भूमिका को देखते हुए राज्य शासन ने बिना किसी देरी के निलंबन (Suspension) का कड़ा आदेश जारी कर दिया। खेतों में लगी अफीम की फसल को भी नष्ट कर दिया गया है।
अवैध नशे (Illegal Drugs) पर सरकार का जीरो टॉलरेंस
राज्य सरकार ने मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध खेती के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ (Zero Tolerance) की नीति अपना रखी है। इस घटना के बाद जिला प्रशासन ने स्पष्ट और सख्त संदेश दिया है कि नशे के अवैध कारोबार में संलिप्त अपराधियों या उन्हें किसी भी प्रकार का संरक्षण देने वाले सरकारी कर्मचारी (Government Employee) को बिल्कुल नहीं बख्शा जाएगा।
मामले की उच्च स्तरीय जांच (High-level Probe) शुरू
अधिकारी के निलंबन के साथ ही इस पूरे अवैध नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने के लिए एक उच्च स्तरीय जांच समिति (Investigation Committee) का गठन कर दिया गया है। पुलिस और नारकोटिक्स टीम अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस अफीम की खेती के पीछे कौन से बड़े सिंडिकेट (Syndicate) काम कर रहे हैं और इसकी सप्लाई चेन कहाँ तक फैली हुई थी।
