छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) से नक्सल विरोधी अभियानों को लेकर एक बेहद ताज़ा और सकारात्मक न्यूज़ सामने आई है। ताज़ा Chhattisgarh Naxal News (छत्तीसगढ़ नक्सल न्यूज़) अपडेट के अनुसार, राज्य के सुरक्षाबलों ने एक अनूठा और अहम फ़ैसला लिया है। न्यूज़ रिपोर्ट्स के मुताबिक़, जो माओवादी कभी जंगलों में सुरक्षाबलों के ख़िलाफ़ सख़्त आईईडी (IED) बिछाते थे, अब वे जवानों को इससे बचने के गुर सिखाएंगे। रोज़ होने वाले नक्सली हमलों पर लगाम लगाने के लिए बस्तर पुलिस का यह क़दम बेहद तेज़ और प्रभावी माना जा रहा है। आम बाज़ार और प्रशासन में इस रणनीति की ज़्यादा तारीफ़ हो रही है, क्योंकि इससे जवानों का सुरक्षा कवच और मज़बूत होगा।
18 पूर्व माओवादियों को मिली ख़ास ज़िम्मेदारी
बस्तर रेंज के आईजीपी (IGP) पी सुंदरराज ने बताया कि सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर और नारायणपुर ज़िलों से ऐसे 18 सरेंडर कर चुके माओवादियों की पहचान की गई है। इन पूर्व नक्सलियों को अब कांकेर स्थित ‘काउंटर टेररिज्म एंड जंगल वारफेयर’ (CTJW) कॉलेज में ट्रेनर के तौर पर नियुक्त किया गया है। पुलिस का पूरा ज़ोर इन पूर्व नक्सलियों की तकनीकी विशेषज्ञता का इस्तेमाल करके सुरक्षाबलों की ऑपरेशनल क्षमता को बढ़ाने पर है।
IED बनाने और लगाने की मिलेगी ट्रेनिंग
अधिकारियों ने साफ़ किया है कि इस सख़्त ट्रेनिंग में जवानों को माओवादियों की रणनीतियों के बारे में प्रैक्टिकल जानकारी दी जाएगी। इन 18 लोगों में से लगभग 15 कैडर ऐसे हैं, जो पहले नक्सली संगठन में आईईडी (IED) ट्रेनर के रूप में काम कर चुके हैं। वहीं, 10 पूर्व नक्सलियों के पास मेडिकल और सिलाई से जुड़े कामों का भी हुनर है।
सुरक्षाबलों को मिलेगा जंगल का अनुभव
सुरक्षाबलों की इस पहल का मुख्य उद्देश्य आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों के गहरे तकनीकी ज्ञान का लाभ उठाना है। ये नए ट्रेनर सुरक्षाबलों को बताएंगे कि घने जंगलों में माओवादी किस तरह की ख़तरनाक चालें चलते हैं। इससे न केवल जवानों को ज़मीनी हक़ीक़त समझने में मदद मिलेगी, बल्कि इन भटके हुए युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में भी भारी सफलता मिलेगी।
