वैश्विक स्तर पर चल रहे तनाव और युद्ध के हालातों ने भारत के लिए एक बड़ा ऊर्जा संकट खड़ा कर दिया है। देश में रसोई गैस यानी LPG Supply Crisis गहराता जा रहा है। मिडिल ईस्ट में जारी सैन्य तनाव और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज जैसे अहम समुद्री मार्ग के बाधित होने से भारत की गैस सप्लाई चेन बुरी तरह टूट गई है। सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने साफ संकेत दिए हैं कि इन हालातों को पूरी तरह सामान्य होने में कम से कम 3 से 4 साल तक का लंबा वक्त लग सकता है।
60 प्रतिशत से घटकर 55 प्रतिशत हुआ आयात
दरअसल, भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक दूसरे देशों पर निर्भर है। देश अपनी कुल एलपीजी जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा यूएई, कतर और सऊदी अरब जैसे खाड़ी देशों से आयात करता है।
- हालिया युद्ध और हमलों के कारण इन देशों से आने वाली सप्लाई में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
- नई रिपोर्ट्स के मुताबिक, खाड़ी देशों से एलपीजी का आयात घटकर अब करीब 55 प्रतिशत ही रह गया है।
- इसके अलावा, इस बात को लेकर भी भारी अनिश्चितता है कि जिन तेल और गैस प्रोडक्शन यूनिट्स को युद्ध में नुकसान पहुंचा है, वे कब तक दोबारा चालू हो पाएंगी।
देश में सिर्फ 15 दिनों का एलपीजी स्टोरेज
इस पूरे संकट में सबसे ज्यादा डराने वाली बात भारत की स्टोरेज क्षमता है। मौजूदा समय में देश के पास एलपीजी का सिर्फ 15 दिनों की खपत के बराबर ही सुरक्षित स्टॉक मौजूद है।
- अगर सप्लाई चेन में कोई और बड़ी रुकावट आती है, तो देश भर में गैस की भारी किल्लत हो सकती है।
- हालांकि, सरकार आम लोगों तक सप्लाई बनाए रखने के लिए कोविड-19 महामारी के दौरान अपनाए गए कड़े उपायों को फिर से लागू करने पर विचार कर रही है।
- इसमें सप्लाई का डायवर्सिफिकेशन, नए देशों से आयात और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना शामिल है।
गैस सिलेंडर की कीमतों में भारी उछाल
इस ग्लोबल क्राइसिस का सीधा और सबसे बुरा असर आम आदमी की जेब पर पड़ने लगा है। सप्लाई में कमी के चलते घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में हाल ही में 60 रुपये तक की बड़ी बढ़ोतरी हुई है। वहीं, कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम भी 115 रुपये तक बढ़ चुके हैं। बढ़ती लागत के कारण होटल, रेस्टोरेंट और छोटे कारोबारियों पर भारी दबाव आ गया है, जो आगे चलकर देश में महंगाई दर को और बढ़ा सकता है।
