CG Govt Employees Order:छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में पिछले 24 घंटों से मचा घमासान अब एक बड़े यू-टर्न पर जाकर खत्म हुआ है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सरकार ने सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों की ‘नेतागिरी’ और राजनीतिक गतिविधियों पर रोक लगाने वाले अपने सख्त आदेश को महज 24 घंटे के भीतर वापस ले लिया है। इस अचानक लिए गए फैसले ने राज्य में सियासी हलचल को और भी तेज कर दिया है।
क्या था सरकार का आदेश और क्यों मचा बवाल?
बुधवार देर रात राज्य सरकार ने एक सख्त निर्देश जारी किया था।
- इस आदेश में कहा गया था कि कोई भी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी किसी भी राजनीतिक दल में पद नहीं रखेगा और न ही किसी राजनीतिक गतिविधि में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हिस्सा लेगा।
- आदेश का उल्लंघन करने पर सिविल सेवा आचरण नियमों के तहत कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी।
- हालांकि, इस आदेश के जारी होते ही इसका कड़ा विरोध शुरू हो गया। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब ऐसे नियम पहले से ही पूरे देश में लागू हैं, तो फिर अचानक यह नया सर्कुलर जारी करने की क्या जरूरत पड़ गई।
कांग्रेस के एक सवाल से बैकफुट पर आई सरकार
सरकार के बैकफुट पर आने की सबसे बड़ी वजह कांग्रेस द्वारा उठाया गया एक तीखा सवाल था।
- कांग्रेस ने आदेश पर सवाल दागते हुए पूछा कि क्या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) जैसे संगठनों के कार्यक्रमों और शाखाओं में भाग लेना भी इन नियमों का उल्लंघन माना जाएगा?
- क्या संघ की गतिविधियों में शामिल होने वाले कर्मचारियों पर भी कार्रवाई होगी? इस एक सवाल ने विवाद को बहुत ज्यादा बढ़ा दिया और सरकार पर स्पष्टीकरण देने का भारी दबाव बन गया।
सरकार की सफाई और आगे की बहस
आदेश वापस लिए जाने के बाद सरकार की तरफ से सफाई दी गई है कि वापस लिया गया सर्कुलर केवल सिविल सेवा (आचरण) नियमों के पुराने प्रावधानों की पुनरावृत्ति मात्र था। सरकारी कर्मचारियों को अपने काम में निष्पक्षता बनाए रखनी चाहिए।
आदेश वापस लेकर साय सरकार ने फिलहाल विवाद को शांत करने की कोशिश जरूर की है, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने एक नई बहस छेड़ दी है। विपक्षी दल अब भी इस बात पर स्पष्टता की मांग कर रहे हैं कि किन गतिविधियों को राजनीतिक माना जाएगा, खासकर कुछ विशेष संगठनों से जुड़े कार्यक्रमों के संदर्भ में।
