Satish Jaggi Murder Case:छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के सबसे बहुचर्चित और हाई-प्रोफाइल मामलों में से एक, रामावतार जग्गी हत्याकांड (Ramavatar Jaggi Murder Case) में एक बड़ा अपडेट सामने आया है। देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) ने इस मामले में जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जोगी (JCC-J) के सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी (Amit Jogi) को एक बहुत बड़ी राहत दी है। सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय (High Court) के उस आदेश पर फिलहाल रोक (Stay) लगा दी है, जिसमें अमित जोगी को आत्मसमर्पण (Surrender) करने का निर्देश दिया गया था।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
सुप्रीम कोर्ट में 23 अप्रैल 2026 को अमित जोगी की अपील पर सुनवाई हुई।
- अमित जोगी की ओर से छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के दो आदेशों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी।
- सर्वोच्च न्यायालय ने हाईकोर्ट के 25 मार्च 2026 (जिसमें अपील दायर करने की अनुमति दी गई) और 2 अप्रैल 2026 (जिसमें अपील को स्वीकार किया गया) के आदेशों को संयुक्त रूप से स्वीकार करते हुए मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर लिया है।
- सबसे अहम फैसला यह रहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अमित जोगी के सरेंडर करने के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है।
CBI से मांगा गया जवाब
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ सरेंडर पर रोक ही नहीं लगाई है, बल्कि जांच एजेंसी सीबीआई (CBI) को भी नोटिस जारी किया है।
- सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे मामले और हाईकोर्ट के आदेशों को लेकर सीबीआई से विस्तृत जवाब मांगा है।
- कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जब तक सीबीआई का जवाब दाखिल नहीं हो जाता और अदालत उस पर विचार नहीं कर लेती, तब तक अमित जोगी के सरेंडर पर यह रोक बरकरार रहेगी। इस फैसले से अमित जोगी को फौरी तौर पर एक बड़ी कानूनी राहत मिल गई है।
क्या है हाईकोर्ट का फैसला?
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने हाल ही में जग्गी हत्याकांड मामले में अपना फैसला सुनाया था।
- हाईकोर्ट ने अमित जोगी को इस हत्या के मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद (Life Imprisonment) की सख्त सजा सुनाई थी।
- सजा सुनाने के साथ ही हाईकोर्ट ने अमित जोगी को 3 हफ्ते (21 दिन) के भीतर पुलिस या अदालत के सामने सरेंडर करने का निर्देश दिया था।
हाईकोर्ट के इसी आदेश के खिलाफ अमित जोगी ने देश की सबसे बड़ी अदालत का दरवाजा खटखटाया था, जहां से फिलहाल उन्हें गिरफ्तारी से बचने की संजीवनी मिल गई है। अब सभी की निगाहें सीबीआई के उस जवाब पर टिकी हैं, जो वह सुप्रीम कोर्ट में पेश करेगी।
