Iran Drone Power:वाशिंगटन/तेहरान। मध्य पूर्व (Middle East) में चल रहे तनाव के बीच एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। अमेरिका (USA) और इजराइल (Israel) के हालिया हवाई हमलों में भारी नुकसान झेलने के बाद ईरान (Iran) उम्मीद से कहीं ज्यादा तेजी से अपनी सैन्य क्षमताओं को फिर से खड़ा कर रहा है। सीएनएन (CNN) की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि ईरान ने अपना ड्रोन उत्पादन (Drone Production) फिर से शुरू कर दिया है और वह जल्द ही अपनी पूरी सैन्य ताकत वापस पा सकता है।
छह महीने में लौट सकती है ड्रोन की पूरी ताकत
अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान की रिकवरी की रफ्तार ने अमेरिकी खुफिया तंत्र (US Intelligence) के अनुमानों को पूरी तरह से गलत साबित कर दिया है।
- ड्रोन प्रोग्राम: ईरान ने आठ अप्रैल को पाकिस्तान (Pakistan) की मध्यस्थता में शुरू हुए युद्धविराम (Ceasefire) के दौरान ही अपने सबसे घातक हथियार यानी ‘ड्रोन’ का उत्पादन फिर से शुरू कर दिया है।
- छह महीने का अनुमान: खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान महज छह महीने के भीतर अपनी ड्रोन हमला करने की पूरी क्षमता को सौ प्रतिशत तक बहाल कर सकता है।
- बाहरी मदद की आशंका: अमेरिकी एजेंसियों का मानना है कि इस तेज रिकवरी में रूस और चीन की अहम भूमिका हो सकती है, जो प्रतिबंधों और नौसैनिक नाकेबंदी के बावजूद ईरान तक मिसाइल निर्माण के पुर्जे पहुंचा रहे हैं।
सैन्य अड्डों और मिसाइल साइट्स की हो रही है मरम्मत
अट्ठाईस फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा शुरू किए गए हमलों में ईरान के कई सैन्य ठिकाने और हथियार प्रणालियां तबाह हो गई थीं। लेकिन अब ईरान तेजी से:
- अपनी क्षतिग्रस्त मिसाइल साइट्स और लॉन्चर्स की मरम्मत कर रहा है।
- उन प्रमुख हथियार प्रणालियों के उत्पादन को तेज कर रहा है, जो युद्ध में नष्ट हो गई थीं।
डोनाल्ड ट्रंप ने दी सैन्य कार्रवाई की धमकी
ईरान की इस तेजी को देखते हुए अमेरिका का रुख भी सख्त हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान एक व्यापक शांति समझौते (Peace Deal) पर सहमत नहीं होता है और सही जवाब नहीं देता है, तो वाशिंगटन उसके खिलाफ फिर से बड़े सैन्य हमलों की शुरुआत करने के लिए पूरी तरह तैयार है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका ज्यादा दिन तक इंतजार नहीं करेगा।
वहीं, ईरान के सुप्रीम लीडर ने भी अपना रुख कड़ा करते हुए निर्देश दिया है कि ईरान का समृद्ध यूरेनियम (Uranium) देश से बाहर नहीं भेजा जाएगा, जो अमेरिका की मुख्य मांगों में से एक है। दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत के बावजूद यह नया खुलासा एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध की आशंका को फिर से बढ़ा रहा है।
