Xi Jinping North Korea Visit: 7 साल बाद नॉर्थ कोरिया पहुंचे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के बढ़ते प्रभाव को ‘काउंटर’ करने की रणनीति

Xi Jinping North Korea visit

Xi Jinping North Korea visit:चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग करीब 7 साल बाद उत्तर कोरिया (North Korea) की यात्रा पर पहुंचे हैं। खास बात यह है कि इस साल शी जिनपिंग पहली बार देश से बाहर निकले हैं। इस दौरे ने वैश्विक स्तर पर, विशेषकर अमेरिका और रूस की कूटनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। जिनपिंग की इस यात्रा के पीछे गहरे भू-राजनीतिक हित छिपे हैं, जिसका सबसे बड़ा कारण उत्तर कोरिया और रूस के बीच बढ़ती नज़दीकियां हैं।

रूस से क्यों परेशान होने लगा है चीन?

हाल के दिनों में उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन (Kim Jong Un) ने जिस तरह से यूक्रेन युद्ध में रूस का खुलकर साथ दिया है, उसने चीन की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

  • हथियार और सेना की सप्लाई: किम जोंग उन ने न सिर्फ व्लादिमीर पुतिन को हथियारों की सप्लाई की है, बल्कि अपनी सेना भी रूस की तरफ से लड़ने के लिए भेजी है।
  • बैलेंस ऑफ पावर की लड़ाई: रॉयटर्स के मुताबिक, उत्तर कोरिया का रूस की तरफ यह झुकाव चीन को अंदर ही अंदर परेशान कर रहा है। चीन कतई नहीं चाहता कि व्लादिमीर पुतिन अकेले ही उत्तर-पूर्व एशिया के सुरक्षा समीकरणों को बदल दें। शी जिनपिंग की इस यात्रा का बड़ा मकसद रूस के प्रभाव को ‘काउंटर’ करना और किम जोंग उन को यह याद दिलाना है कि बीजिंग ही उनका सबसे बड़ा बॉस है।

अमेरिका के लिए चीन का ‘ट्रम्प कार्ड’

शी जिनपिंग का यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब हाल ही में उनकी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात हुई थी। व्यापार युद्ध और तनातनी के बीच, चीन इस दौरे के जरिए अमेरिका को एक कड़ा संदेश देना चाहता है।

  • जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश फाउंडेशन के विशेषज्ञ सियोंग-ह्योन ली के अनुसार, इस गरीब लेकिन परमाणु संपन्न पड़ोसी पर अपना दबदबा दिखाकर चीन यह सुनिश्चित कर रहा है कि एशिया में सुरक्षा वास्तुकला को उसकी मर्जी के बिना कोई नया रूप नहीं दे सकता।
  • चीन ने अब उत्तर कोरिया को एक ‘परमाणु संपन्न देश’ के रूप में स्वीकार कर लिया है। एक परमाणु शक्ति संपन्न उत्तर कोरिया, चीन के लिए ‘बफर स्टेट’ (Buffer State) का काम करता है, जो अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया की सैन्य ताकत को उलझाए रखता है।

किम जोंग उन को क्यों पड़ी चीन की जरूरत?

रूस से सैन्य तकनीक मिलने के बावजूद किम जोंग उन को इस वक्त चीन की सख्त जरूरत है और इसका मुख्य कारण ‘आर्थिक तंगी’ है।

  • सियोल के ‘इंस्टीट्यूट ऑफ नेशनल यूनिफिकेशन’ के पूर्व अध्यक्ष कोह यू-ह्वान का मानना है कि रूस के भरोसे उत्तर कोरिया की डूबती अर्थव्यवस्था को बचाया नहीं जा सकता।
  • आर्थिक संजीवनी: इस दौरे के बाद चीन उत्तर कोरिया को ‘इकोनॉमिक लाइफलाइन’ देने जा रहा है। चीन भारी मात्रा में चावल और उर्वरकों की खेप भेजेगा। साथ ही, कोरोना काल से बंद यालू नदी के पुल और अन्य बॉर्डर इन्फ्रास्ट्रक्चर को फिर से चालू किया जाएगा।
  • विदेशी मुद्रा के लिए चीन अपने पर्यटकों को भी फिर से उत्तर कोरिया जाने की अनुमति देगा।

इस तरह, आर्थिक मदद का लालच देकर शी जिनपिंग ने अपने पुराने और बिगड़े हुए दोस्त किम जोंग उन को दोबारा पूरी तरह से अपने पाले में खींचने की एक बड़ी चाल चली है।