Pakistan Passport Israel: ट्रंप की शर्त से सन्न रह गया पाकिस्तान, इजरायल को मान्यता दी तो बदलना पड़ेगा पासपोर्ट

Pakistan Passport Israel

Pakistan Passport Israel:वाशिंगटन/इस्लामाबाद। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) मिडिल ईस्ट की दशकों पुरानी दुश्मनी को खत्म करने के लिए बेहद आक्रामक कूटनीति अपना रहे हैं। ट्रंप ने सऊदी अरब, कतर और पाकिस्तान जैसे प्रमुख मुस्लिम देशों के सामने स्पष्ट शर्त रखी है कि उन्हें इजरायल (Israel) के साथ अपने राजनयिक और आर्थिक रिश्ते सामान्य करने होंगे। वीकेंड पर एक हाई-लेवल कॉन्फ्रेंस कॉल के दौरान ट्रंप की इस मांग ने पाकिस्तान को पूरी तरह से सन्न कर दिया है, क्योंकि अगर पाकिस्तान इस ऐतिहासिक समझौते का हिस्सा बनता है, तो उसके सामने सबसे बड़ा संकट खुद उसका अपना पासपोर्ट (Passport) होगा।

ट्रंप का ‘अब्राहम अकॉर्ड्स’ और चेतावनी

डोनाल्ड ट्रंप का उद्देश्य 2020 में उनके पहले कार्यकाल के दौरान शुरू हुए ‘अब्राहम अकॉर्ड्स’ (Abraham Accords) का विस्तार करना है।

  • बाहर करने की चेतावनी: ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा है कि जो देश इस ऐतिहासिक क्षेत्रीय बदलाव का हिस्सा बनने के लिए तैयार नहीं हैं, उन्हें ईरान के साथ भविष्य में होने वाली किसी भी बड़ी डील से बाहर कर दिया जाएगा।
  • आर्थिक उछाल का दावा: सोशल मीडिया पर एक लंबी पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि उन्होंने इस जटिल पहेली को सुलझाने के लिए बहुत मेहनत की है। उन्होंने इसे मिडिल ईस्ट के लिए एक वित्तीय और सामाजिक उछाल बताया है, जो पूरे क्षेत्र को आर्थिक रूप से शक्तिशाली बनाएगा।

पाकिस्तान के सामने फंसा ‘पासपोर्ट’ का पेंच

यदि पाकिस्तान किसी भी दबाव या कूटनीतिक मजबूरी में ट्रंप की इस शर्त को मान लेता है और इजरायल को मान्यता दे देता है, तो उसे एक बड़ी प्रशासनिक और कानूनी अड़चन का सामना करना पड़ेगा।

  • पासपोर्ट पर छपी पाबंदी: वर्तमान में, पाकिस्तान दुनिया का अकेला ऐसा देश है जिसके आधिकारिक पासपोर्ट बुकलेट पर साफ-साफ एक कानूनी पाबंदी छपी होती है। उसमें स्पष्ट लिखा होता है, “यह पासपोर्ट इजरायल को छोड़कर दुनिया के सभी देशों के लिए मान्य है।”
  • बदलना होगा कानून: अगर पाकिस्तान इजरायल के साथ व्यापार, पर्यटन या राजनयिक संबंध शुरू करता है, तो उसे अपने पासपोर्ट से इस लाइन को हमेशा के लिए हटाना होगा।
  • ऐसा न करने पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा कानूनी विरोधाभास खड़ा हो जाएगा। दशकों से पाकिस्तान की विदेश नीति इसी बुनियाद पर टिकी है कि जब तक फिलिस्तीन एक स्वतंत्र राष्ट्र नहीं बनता, इजरायल को मान्यता नहीं दी जाएगी।

ट्रंप के इस कड़े रुख ने इस्लामाबाद की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, क्योंकि पाकिस्तान को अब अमेरिका के साथ अपने रणनीतिक रिश्तों और अपनी दशकों पुरानी घरेलू विचारधारा के बीच किसी एक को चुनना होगा।