Waqf Board Chairman Salim Raj Kawardha:कवर्धा। एक तरफ देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) लगातार सादगी, सरकारी खर्चों में कटौती और देश से वीआईपी संस्कृति (VIP Culture) खत्म करने का कड़ा संदेश दे रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, छत्तीसगढ़ में जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग ही इस संदेश की धज्जियां उड़ाते नजर आ रहे हैं। ताजा मामला छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज (Dr. Salim Raj) के कवर्धा दौरे से जुड़ा है, जिसे लेकर अब मुस्लिम समाज के बीच कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
चार गाड़ियों के काफिले के साथ अचानक किया निरीक्षण
जानकारी के अनुसार, वक्फ बोर्ड अध्यक्ष डॉ. सलीम राज पूरे वीआईपी लाव-लश्कर और चार गाड़ियों के काफिले के साथ कवर्धा पहुंचे थे।
- बताया जा रहा है कि उनके इस दौरे का मुख्य उद्देश्य शहर में मुस्लिम जमात की तीन दुकानों और केजीएन कॉम्प्लेक्स (KGN Complex) के पास सड़क पर हो रहे निर्माण कार्य का निरीक्षण करना था।
- उन्होंने मौके पर जाकर इन संपत्तियों का जायजा भी लिया, लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में स्थानीय जिम्मेदार लोगों को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया।
स्थानीय जमात और पदाधिकारियों को रखा गया अंधेरे में
इस पूरे दौरे में सबसे ज्यादा हैरानी की बात यह रही कि कवर्धा मुस्लिम जमात के अध्यक्ष और स्थानीय पदाधिकारियों को इस निरीक्षण की न तो कोई पूर्व सूचना दी गई और न ही उनसे कोई औपचारिक मुलाकात की गई। स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भारी नाराजगी और चर्चा है कि जब किसी सामाजिक और धार्मिक संपत्ति का निरीक्षण किया जाता है, तो स्थानीय जमात और उसके पदाधिकारियों को विश्वास में लेना बेहद जरूरी होता है। मगर, डॉ. सलीम राज के इस दौरे में ऐसा कोई भी शिष्टाचार दिखाई नहीं दिया।
गोपनीयता और पारदर्शिता पर उठ रहे सवाल
समाज के लोगों ने वक्फ बोर्ड की कार्यप्रणाली पर सीधा सवाल उठाते हुए पूछा है कि:
- यदि यह निरीक्षण पारदर्शिता और व्यवस्था सुधार के लिए था, तो स्थानीय प्रतिनिधियों से चर्चा क्यों नहीं की गई?
- आखिर इतनी गोपनीयता किस बात की थी?
- क्या वक्फ बोर्ड केवल औपचारिक और दिखावटी दौरे कर रहा है या वास्तव में समाज के लोगों की राय को कोई अहमियत दी जाएगी?
कवर्धा शहर में अब यह मामला चर्चा का मुख्य विषय बन गया है। समाज से दूरी बनाकर और बिना मुलाकात किए वापस लौटने पर वक्फ बोर्ड अध्यक्ष के रवैये की कड़ी आलोचना हो रही है।
