HDFC Bank Controversy:भारत के सबसे बड़े निजी बैंक, एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) ने उन मीडिया रिपोर्ट्स का कड़ाई से खंडन किया है, जिनमें दावा किया गया था कि बैंक ने महाराष्ट्र की एक सरकारी एजेंसी को अतिरिक्त ब्याज देने के लिए 45 करोड़ रुपये की हेराफेरी की। पिछले 3 महीनों में यह दूसरी बार है जब बैंक ने इन आरोपों को नकारा है। इस विवादित खबर के सामने आते ही शेयर बाजार में एचडीएफसी बैंक के शेयरों में 2% तक की गिरावट दर्ज की गई।
क्या हैं बैंक पर लगे मुख्य आरोप?
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, बैंक की आंतरिक सतर्कता जांच में पाया गया था कि बैंक ने महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों को ताक पर रखा:
- मार्केटिंग फंड का दुरुपयोग: आरोप है कि बैंक ने MSRDC को अतिरिक्त ब्याज (Differential Interest) देने के लिए 45 करोड़ रुपये की रकम को ‘मार्केटिंग खर्च’ के तौर पर दिखाया।
- सड़क सुरक्षा अभियान का बहाना: यह पैसा ‘सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान’ के नाम पर चार स्थानीय वेंडरों के जरिए MSRDC तक पहुंचाया गया, ताकि आरबीआई (RBI) के नियमों की अनदेखी की जा सके।
- पूर्व चेयरमैन का इस्तीफा: रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि बैंक के पूर्व चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने इसी साल मार्च में इन्हीं ‘नैतिक चिंताओं’ और कॉर्पोरेट गवर्नेंस के मुद्दों के कारण इस्तीफा दे दिया था।
ब्याज दरों में भारी अंतर (Interest Rate Discrepancy)
रिपोर्ट के मुताबिक, बैंक ने सरकारी एजेंसी के बड़े डिपॉजिट को बनाए रखने के लिए आम ग्राहकों की तुलना में काफी अधिक रिटर्न का वादा किया था।
| ग्राहक श्रेणी (Customer Category) | लागू ब्याज दर (Applicable Interest Rate) |
| MSRDC (कथित तौर पर तय किया गया) | 6.01% |
| आम बचत खाता ग्राहक (Regular Savings Account) | 3.5% |
एचडीएफसी बैंक का आधिकारिक बयान
इन गंभीर आरोपों पर एचडीएफसी बैंक ने आधिकारिक बयान जारी कर किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया है। बैंक ने कहा, “हमारी आंतरिक निगरानी, ऑडिट और नियंत्रण प्रक्रियाएं बेहद मजबूत हैं। हम चुनिंदा दस्तावेजों के आधार पर लगाए गए किसी भी गलत काम या लापरवाही के दावों को पूरी तरह से खारिज करते हैं।”
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के सख्त दिशा-निर्देशों के अनुसार, कोई भी बैंक जमा राशि पर तय और घोषित दरों से अलग किसी विशेष ग्राहक को अलग से रिटर्न (Negotiated Returns) नहीं दे सकता। यदि आरबीआई इस मामले में आगे कोई जांच करता है, तो बैंक की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।:
