कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस वक्त एक अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी गुट के प्रमुख नेता सुदीप बंदोपाध्याय ने एक अनजान सी पार्टी में शामिल होने का ऐलान कर दिया। पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, “नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी। ये पार्टी के साथ हमलोग शामिल हुआ।”
जब पत्रकारों ने पूछा कि यह पार्टी कहां की है? तो उन्होंने कहा कि यह एक मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय (Regional) पार्टी है जिसके साथ उनका विलय (Merger) हुआ है। हालांकि, अगले ही पल उन्होंने यह भी कह दिया कि वे ‘असली तृणमूल पार्टी’ होने का दावा करेंगे और इसका फैसला कोर्ट में होगा। टीएमसी सांसद शताब्दी रॉय के बयानों में भी इसी तरह की दुविधा दिखी, जहां उन्होंने सिंबल पर क्लेम न करने की बात भी कही और फैसले का जिम्मा स्पीकर पर भी छोड़ दिया।
विलय में आ सकती हैं कानूनी अड़चनें
सुदीप बंदोपाध्याय जिस ‘नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी’ (NCP) का नाम ले रहे थे, उसे बोलते वक्त वे सहज नहीं दिखे। उन्होंने इसे ‘मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय पार्टी’ बताया, जबकि चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार इस नाम से रजिस्टर्ड पार्टी ‘गैर-मान्यता प्राप्त’ (Unrecognized) वर्ग में आती है।
इस विलय में कई कानूनी और व्यावहारिक अड़चनें नजर आ रही हैं:
- पार्टी की स्थिति स्पष्ट नहीं: अभी तक नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी की तरफ से कोई भी नेता सामने नहीं आया है। इस पार्टी का संगठन कैसा है, इसका क्या स्टेटस है, और क्या उन्हें इस विलय की जानकारी भी है—यह सब पूरी तरह से अस्पष्ट है।
- बीजेपी की दुविधा: ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस भले ही संकट में दिख रही हो, लेकिन टीएमसी के बागी गुट और बीजेपी के लिए भी आगे का रास्ता आसान नहीं है। बीजेपी को भी कई कानूनी और राजनीतिक आशंकाओं से पार पाना होगा।
क्या है 75 रुपये वाली इस पार्टी की कहानी?
पश्चिम बंगाल के चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर (CEO) की वेबसाइट से इस रहस्यमयी ‘नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी’ के बारे में कई चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं:
- पार्टी का नाम और स्टेटस: चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में इसका पूरा नाम ‘नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया’ (NCPI) है और यह जनवरी 2023 में हावड़ा (पश्चिम बंगाल) के पते पर ‘अनरिकॉग्नाइज्ड’ पार्टी के तौर पर रजिस्टर्ड हुई थी।
- बैलेंस शीट में सिर्फ 75 रुपये: पार्टी द्वारा जमा की गई ऑडिटर रिपोर्ट (2022-2023) के अनुसार, 31 मार्च 2023 को खत्म हुए वित्त वर्ष में इस पार्टी के पास मात्र 75 रुपये बचे थे।
- चुनाव में जमानत जब्त: इस पार्टी ने कुल 1,13,075 रुपये का चंदा जुटाया था। इसमें से कुछ पैसे रजिस्ट्रेशन और चुनाव फीस में खर्च कर दिए गए। फरवरी 2023 में त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में इसके दो उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा था और दोनों की ही जमानत जब्त हो गई थी।
चंदे के रिकॉर्ड में भी भारी गड़बड़ी
पार्टी द्वारा इनकम टैक्स छूट के लिए जमा किए गए ‘फॉर्म 24A’ (जो 20,000 रुपये से ज्यादा के चंदे के लिए होता है) में भी कई गड़बड़ियां देखने को मिली हैं:
- फॉर्म में किसी भी व्यक्ति ने 20,000 रुपये से ज्यादा का चंदा नहीं दिया है, फिर भी फॉर्म भरा गया।
- साल 2017 के नियम के अनुसार, राजनीतिक पार्टियां 2,000 रुपये से ज्यादा नकद (Cash) चंदा नहीं ले सकतीं, लेकिन इस पार्टी ने अपना पूरा चंदा नकद में लिया है। किसी का पैन (PAN) नंबर भी दर्ज नहीं है।
- फॉर्म पर पार्टी अध्यक्ष के रूप में ‘शेवली कुंडू’ के हस्ताक्षर हैं, और चंदा देने वालों की लिस्ट में भी उन्हीं का और उनके पिता का नाम शामिल है।
पश्चिम बंगाल के मौजूदा राजनीतिक घमासान में सबसे दिलचस्प बात यह है कि 75 रुपये की बैलेंस शीट वाली यह अनजान और गैर-मान्यता प्राप्त पार्टी (NCPI) आज देश की सबसे ताकतवर पार्टी (बीजेपी) और टीएमसी के बागी गुट की बड़ी राजनीतिक ढाल बनती नजर आ रही है।
