CG Vidhansabha: छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र की तारीखों का आधिकारिक ऐलान, 13 जुलाई से शुरू होगा सदन; देखें पूरा शेड्यूल

Chhattisgarh Assembly Monsoon Session Schedule

रायपुर: छत्तीसगढ़ विधायी कामकाज को लेकर एक बड़ी और आधिकारिक खबर सामने आई है। छत्तीसगढ़ विधानसभा के आगामी मानसून सत्र (Monsoon Session) की तारीखों का औपचारिक ऐलान कर दिया गया है। विधानसभा सचिवालय द्वारा जारी की गई आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, 6ठी विधानसभा का यह 10वां सत्र आगामी 13 जुलाई से शुरू होकर 17 जुलाई तक चलेगा। पांच दिनों की इस सीमित अवधि में सदन की कुल पांच बैठकें आयोजित की जाएंगी।

मानसून सत्र का विस्तृत कार्यक्रम (Schedule)

विधानसभा सचिव दिनेश शर्मा द्वारा जारी की गई आधिकारिक दिनदर्शिका (Calendar) के अनुसार, 5 दिवसीय सत्र का संचालन कुछ इस प्रकार तय किया गया है:

  • 13 जुलाई (सोमवार): प्रश्नोत्तर काल और शासकीय कार्य।
  • 14 जुलाई (मंगलवार): प्रश्नोत्तर काल और शासकीय कार्य।
  • 15 जुलाई (बुधवार): प्रश्नोत्तर काल और शासकीय कार्य।
  • 16 जुलाई (गुरुवार): प्रश्नोत्तर काल और शासकीय कार्य।
  • 17 जुलाई (शुक्रवार): प्रश्नोत्तर काल, शासकीय कार्य और सत्र के अंतिम ढाई घंटे अशासकीय कार्य (निजी संकल्प एवं विधेयक) के लिए निर्धारित किए गए हैं।

बेहद हंगामेदार होने के आसार

चूंकि इस बार मानसून सत्र की अवधि केवल पांच दिनों की है, इसलिए राजनीतिक गलियारों में इसके बेहद ‘हंगामेदार’ होने के कयास अभी से लगाए जाने लगे हैं। विपक्ष (कांग्रेस) के पास सरकार को घेरने के लिए समय कम होगा, जिसके चलते वे पहले ही दिन से आक्रामक रुख अपना सकते हैं। राज्य के विभिन्न जनहित के मुद्दों, कानून व्यवस्था और वित्तीय मामलों को लेकर विपक्ष ने सरकार को कटघरे में खड़ा करने की पूरी रणनीति तैयार कर ली है।

दूसरी ओर, सत्तापक्ष (भाजपा) भी विपक्ष के हर तीखे सवाल का करारा जवाब देने और अपने महत्वपूर्ण शासकीय एजेंडे व विधेयकों को बिना किसी बाधा के सदन के पटल पर रखकर पारित कराने के लिए पूरी तरह कमर कस चुका है।

राजनीतिक दृष्टिकोण से बेहद अहम सत्र

भले ही इस मानसून सत्र की कार्य अवधि काफी कम रखी गई है, लेकिन राजनीतिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से इसे बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार के आगामी बड़े नीतिगत फैसलों और विपक्ष के तीखे हमलों के बीच सदन के भीतर होने वाली बहसों पर अब पूरे प्रदेश की जनता और राजनीतिक विश्लेषकों की नजरें टिकी रहेंगी।