जगदलपुर: लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को सुरक्षित रखने और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए सोमवार (15 जून) को जगदलपुर में पत्रकारों ने बड़ा कदम उठाया। ‘बस्तर जिला पत्रकार संघ’ के आह्वान पर जिलेभर के पत्रकारों ने एकजुट होकर एक दिवसीय शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन किया। इस धरने में शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक के तमाम मीडियाकर्मी शामिल हुए और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया।
क्यों धरने पर बैठे बस्तर के पत्रकार?
पत्रकारों का यह धरना मुख्य रूप से उनकी सुरक्षा, उन पर हो रहे कथित झूठे मुकदमों और कवरेज के दौरान आ रही बाधाओं के विरोध में आयोजित किया गया था।
धरना स्थल पर मौजूद पत्रकारों और संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने एक सुर में कहा कि समाज की सच्चाई को सामने लाने वाले पत्रकारों की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। कई बार खबरों के प्रकाशन से नाराज होकर रसूखदारों और कुछ अधिकारियों द्वारा पत्रकारों को झूठे मामलों (Fake FIR) में फंसाने की धमकियां दी जाती हैं, जो कि पूरी तरह से अनुचित और निंदनीय है।
पत्रकार संघ की मुख्य मांगें
इस एक दिवसीय धरना प्रदर्शन के दौरान बस्तर जिला पत्रकार संघ ने शासन-प्रशासन के सामने अपनी कई सूत्रीय मांगें रखीं, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
- पत्रकार सुरक्षा कानून लागू हो: प्रदेश में ‘पत्रकार सुरक्षा कानून’ (Journalist Protection Act) को धरातल पर पूरी सख्ती और पारदर्शिता के साथ लागू किया जाए, ताकि पत्रकार बिना किसी भय के निष्पक्ष पत्रकारिता कर सकें।
- झूठे मुकदमों की वापसी: पत्रकारों के खिलाफ दुर्भावनापूर्ण तरीके से दर्ज किए गए सभी झूठे आपराधिक मामलों को तत्काल वापस लिया जाए।
- दुर्व्यवहार पर कड़ी कार्रवाई: सरकारी कार्यालयों या फील्ड कवरेज के दौरान पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
- टोल प्लाजा और अन्य सुविधाएं: पत्रकारों को सरकारी स्तर पर मिलने वाली मान्यता और सुविधाओं में किसी भी प्रकार की प्रशासनिक अड़चन पैदा न की जाए।
प्रशासन को सौंपा ज्ञापन, दी उग्र आंदोलन की चेतावनी
दिनभर चले इस धरने के अंत में बस्तर जिला पत्रकार संघ के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री और राज्यपाल के नाम स्थानीय जिला प्रशासन के अधिकारियों को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी इन न्यायोचित मांगों पर जल्द से जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और भी उग्र रूप लेगा। जरूरत पड़ी तो पूरे बस्तर संभाग के पत्रकार अपने कैमरे और कलम बंद कर सड़कों पर अनिश्चितकालीन प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे।
