Chhattisgarh Government: बिना आधिकारिक रिकॉर्ड के चल रहे कई सरकारी विभाग, GAD के नोटिस का भी नहीं दे रहे जवाब

Chhattisgarh Govt Departments

Chhattisgarh Govt Departments:रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार (Chhattisgarh Government) के कामकाज में एक बड़ी प्रशासनिक लापरवाही और अराजकता की तस्वीर सामने आई है। राज्य शासन के कई विभाग ऐसे विषयों पर काम कर रहे हैं, जिनका सरकार के पास कोई आधिकारिक रिकॉर्ड ही मौजूद नहीं है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि पूरे सिस्टम की निगरानी करने वाला सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) बार-बार पत्र लिखकर विभागों से पूछ रहा है कि वे किस अधिकार के तहत काम कर रहे हैं, लेकिन अधिकांश विभाग इसका जवाब देने तक की जहमत नहीं उठा रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब जिम्मेदारियों और अधिकारों को राजपत्र (Gazette) में विधिवत अधिसूचित ही नहीं किया गया है, तो ये विभाग किस नियम के तहत फैसले ले रहे हैं और कार्रवाई कर रहे हैं।

रिकॉर्ड में ही दर्ज नहीं हैं विभागों के दायित्व

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, कई विभागों ने वर्षों पहले नए नियमों और संशोधनों के आधार पर अपना काम शुरू कर दिया था। नई योजनाएं बनीं, आदेश जारी हुए और उन पर धरातल पर कार्रवाई भी की गई। लेकिन सबसे बड़ी खामी यह रही कि इन कार्यों को कभी विधिवत सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं कराया गया। नतीजतन, आज शासन के पास यह प्रामाणिक जानकारी ही नहीं है कि कौन सा विभाग किस विशिष्ट विषय का नोडल विभाग है। सामान्य प्रशासन विभाग लगातार विभागों को पत्र भेजकर उनके दायित्व, संशोधन और अधिसूचनाओं की जानकारी मांग रहा है, लेकिन विभागों की तरफ से न तो जवाब आ रहा है और न ही दस्तावेज भेजे जा रहे हैं।

बिना अधिकृत आदेश के चल रही कार्रवाई, गृह विभाग भी शामिल

प्रशासनिक गलियारों में सबसे ज्यादा सवाल उन विषयों को लेकर उठ रहे हैं, जहां विभाग काम तो कर रहे हैं, लेकिन उनके पास अधिकृत आदेश मौजूद नहीं हैं। जानकारी के अनुसार आरटीई (RTE), सीजीएसएससी, और राजमार्ग निर्माण जैसे कई अहम प्रशासनिक विषयों पर बिना पुख्ता दस्तावेजों के काम चल रहा है। हैरानी की बात यह है कि गृह विभाग से जुड़े मामलों में भी यही स्थिति है। देश में भारतीय दंड संहिता (IPC) की जगह अब नई भारतीय न्याय संहिता (BNS) लागू हो चुकी है और इसके तहत मामले भी दर्ज किए जा रहे हैं। लेकिन, बताया जा रहा है कि गृह विभाग ने अब तक कई नई प्रक्रियाओं को विधिवत अधिसूचित नहीं कराया है। जमीन पर कानून बदल चुका है, लेकिन कागजों में अब भी पुराना सिस्टम ही दौड़ रहा है।

सरकार के लिए बन सकता है बड़ा कानूनी संकट

प्रशासनिक जानकारों और विशेषज्ञों का मानना है कि ‘पहले काम करो, बाद में कागज देखेंगे’ वाला यह मॉडल सरकार के लिए बहुत बड़ा कानूनी संकट पैदा कर सकता है। अगर किसी विभाग की ओर से की गई कार्रवाई को भविष्य में अदालत (Court) में चुनौती दी जाती है, तो विभाग के सामने यह साबित करना मुश्किल हो जाएगा कि उसे वह कार्रवाई करने का कानूनी अधिकार कहां से मिला। जब तक दायित्वों की राजपत्र में अधिसूचना नहीं होती और रिकॉर्ड अपडेट नहीं होता, तब तक किसी भी कार्रवाई की वैधानिकता पर सीधे सवाल खड़े हो सकते हैं।

खुद GAD के विषयों का रिकॉर्ड है अधूरा

इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि पूरे शासन का रिकॉर्ड संभालने वाले सामान्य प्रशासन विभाग के अपने कामकाज का दस्तावेजीकरण भी अधूरा है। ‘लोक सेवा गारंटी’ जैसे महत्वपूर्ण विषय, जिसके तहत अधिकारियों के कामकाज की समय-सीमा तय होती है, वह जीएडी के ही अंतर्गत आता है। लेकिन विभागीय रिकॉर्ड में इसकी स्थिति भी पूरी तरह से स्पष्ट नहीं बताई जा रही है। जाहिर है, विभागों की इस मनमानी और कागजी प्रक्रियाओं को दरकिनार करने की प्रवृत्ति से पूरे प्रशासनिक सिस्टम की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवालिया निशान लग गए हैं।