Iran Attack on Indian Ships: भारतीय तेल टैंकरों पर फायरिंग के बाद ईरान की सफाई, भारत से बताए 5000 साल पुराने संबंध

समुद्र में एक भारतीय तेल टैंकर और बैकग्राउंड में विदेश मंत्रालय का प्रतीकात्मक चित्र

Iran Attack on Indian Ships:मध्य पूर्व (Middle East) में जारी तनाव अब सीधे तौर पर भारत के व्यापारिक हितों को प्रभावित करने लगा है। अशांत समुद्री क्षेत्र स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में 2 भारतीय ध्वज वाले तेल टैंकरों पर ईरानी नौसेना द्वारा की गई गोलाबारी के बाद भारत और ईरान के बीच कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस गंभीर घटना पर भारत ने बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए ईरानी राजदूत को तलब किया है, जिसके बाद ईरान की तरफ से भी सफाई सामने आई है। ईरान ने इस घटना से अनभिज्ञता जताते हुए भारत के साथ अपने 5000 साल पुराने संबंधों की दुहाई दी है।

भारत का कड़ा रुख और राजदूत तलब

शनिवार को भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस घटना को बेहद गंभीरता से लिया।

  • विदेश मंत्रालय ने भारत में मौजूद ईरानी राजदूत मोहम्मद फथाली को तलब कर इस घटना पर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया।
  • ओमान के उत्तर में ईरानी नौसेना ने 2 भारतीय टैंकरों ‘जग अर्नव’ और ‘सनमार हेराल्ड’ पर फायरिंग की थी। ये दोनों जहाज इराक से कच्चा तेल लेकर आ रहे थे।
  • विदेश सचिव ने ईरानी राजदूत को स्पष्ट किया कि भारत अपने व्यापारिक जहाजों और नाविकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है।
  • मंत्रालय ने कहा कि व्यापारिक जहाजों पर फायरिंग की यह घटना बेहद गंभीर है और ईरान सरकार को होर्मुज से भारत आने वाले जहाजों के लिए सुरक्षित मार्ग जल्द से जल्द बहाल करना चाहिए।

ईरान की सफाई: ‘हमें घटना की जानकारी नहीं’

भारत के कड़े एक्शन के बाद ईरान की तरफ से बचाव में बयान जारी किया गया है।

  • भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने इस फायरिंग की घटना पर अनभिज्ञता जाहिर की है।
  • उन्होंने एक न्यूज़ एजेंसी से बातचीत में कहा कि उन्हें इस घटना की कोई जानकारी नहीं है, लेकिन भारत और ईरान के संबंध 5000 साल पुराने हैं और बहुत मजबूत हैं।
  • इलाही ने कहा कि ईरान युद्ध के पक्ष में नहीं है और उन्हें उम्मीद है कि यह मामला बातचीत से सुलझ जाएगा। उन्होंने इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशक्यान के बीच हुई सफल वार्ताओं का भी जिक्र किया।

होर्मुज जलमार्ग बंद, कच्चे तेल की आपूर्ति पर संकट

इस घटना के पीछे एक बड़ा भू-राजनीतिक कारण अमेरिका और ईरान के बीच का तनाव है।

चूंकि वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है, इसलिए इस तनाव से दुनिया भर में ईंधन की कीमतें बढ़ने का भारी खतरा पैदा हो गया है।

ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक अमेरिका ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी जारी रखेगा, तब तक होर्मुज का जलमार्ग बंद रहेगा।

ईरानी नौसेना ने चेतावनी दी है कि इस जलडमरूमध्य के पास आने वाले किसी भी जहाज को दुश्मन का सहयोगी माना जाएगा और उसे निशाना बनाया जा सकता है।

भारतीय जहाजों पर हुए इस हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय जहाजों ने भी इस मार्ग से दूरी बनाना शुरू कर दिया है।