Iran Attacks US Military Base:वाशिंगटन/तेहरान। मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष ने एक बार फिर बेहद खतरनाक मोड़ ले लिया है। ईरान ने अमेरिका के हालिया हमलों का कड़ा जवाब देते हुए कुवैत में स्थित एक अमेरिकी सैन्य अड्डे पर बैलिस्टिक मिसाइल से बड़ा हमला किया है। इस भीषण स्ट्राइक में कई अमेरिकी सैनिकों के घायल होने की खबर है, वहीं अमेरिकी सेना के बेहद आधुनिक और घातक ‘रीपर ड्रोन्स’ (MQ-9 Reaper Drones) को भी भारी नुकसान पहुंचा है। दोनों देशों के बीच बना नाजुक युद्धविराम अब पूरी तरह से टूटने के कगार पर पहुंच गया है।
कुवैत के ‘अली अल सलेम एयर बेस’ पर गिरा मिसाइल का मलबा
अमेरिकी अधिकारियों ने इस बड़े हमले की पुष्टि करते हुए बताया कि पिछले 24 घंटों के भीतर ईरान ने कुवैत में स्थित ‘अली अल सलेम एयर बेस’ (Ali Al Salem Air Base) को निशाना बनाया।
- हमले का प्रभाव: कुवैत के एयर डिफेंस सिस्टम ने ईरान की ‘फतेह-110’ (Fateh-110) बैलिस्टिक मिसाइल को हवा में ही रोक दिया था, लेकिन मिसाइल का भारी मलबा एयर बेस की बाउंड्री के अंदर आकर गिरा।
- सैनिक घायल: मलबे की चपेट में आने और आंशिक प्रभाव के कारण एक्टिव-ड्यूटी सैन्य कर्मियों और कॉन्ट्रैक्टर्स सहित लगभग 5 अमेरिकी घायल हुए हैं।
- रीपर ड्रोन तबाह: इस हमले में अमेरिका के दो बेहद अहम ‘MQ-9 रीपर’ स्ट्राइक ड्रोन को भारी नुकसान पहुंचा है। इनमें से एक ड्रोन पूरी तरह नष्ट हो गया है, जबकि एक अन्य बुरी तरह क्षतिग्रस्त है। आपको बता दें कि एक MQ-9 रीपर ड्रोन की कीमत लगभग 3 करोड़ डॉलर (करीब 250 करोड़ रुपये) होती है, जो अमेरिकी खुफिया निगरानी और हवाई हमलों का मुख्य हथियार हैं।
हालिया अमेरिकी हमलों का है सीधा जवाब
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इस हमले की पूरी जिम्मेदारी ली है।
- ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, IRGC ने स्पष्ट किया है कि गुरुवार सुबह उसके बलों ने जानबूझकर उस अमेरिकी एयर बेस को निशाना बनाया, जहां से रात में ईरान के दक्षिणी हिस्से, खासकर बंदर अब्बास (Bandar Abbas) क्षेत्र में हवाई हमले किए गए थे।
- ईरान ने इसे अपनी संप्रभुता की रक्षा और “आक्रामक अमेरिकी हमले” के खिलाफ की गई आवश्यक जवाबी कार्रवाई करार दिया है।
ट्रंप की अहम बैठक रही बेनतीजा
यह घातक हमला ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ईरान के साथ युद्धविराम की अवधि बढ़ाने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने संबंधी समझौते पर विचार कर रहे थे।
बैठक से पहले ट्रंप ने ‘अंतिम निर्णय’ लेने का दावा किया था, लेकिन प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, लगभग दो घंटे तक चली यह लंबी बैठक बिना किसी ठोस निर्णय और समझौते के समाप्त हो गई। इस हमले के बाद मिडिल ईस्ट में एक बार फिर से पूर्ण युद्ध भड़कने की आशंका तेज हो गई है।
हमले के बीच, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने आधिकारिक आवास व्हाइट हाउस के सीक्रेट रूम में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के साथ एक अहम बैठक की।
