Iran President Masoud Pezeshkian Resignation:तेहरान। अमेरिका के साथ छिड़े सीधे सैन्य टकराव (US-Iran War) के बीच ईरान के भीतर से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान (Masoud Pezeshkian) ने अपने पद से अचानक इस्तीफा दे दिया है। अमेरिका द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य के एक रणनीतिक द्वीप पर किए गए मिसाइल हमले और ईरान की तरफ से अंडरग्राउंड बंकरों को खोले जाने के बाद, अब देश के भीतर एक अभूतपूर्व राजनीतिक संकट (Political Crisis) खड़ा हो गया है। माना जा रहा है कि यह इस्तीफा ईरान की कड़े रुख वाली सेना यानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के साथ बढ़े गंभीर मतभेदों का परिणाम है।
कूटनीति बनाम सैन्य कार्रवाई: इस्तीफे की मुख्य वजह
सूत्रों और अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान अमेरिका के साथ पूर्ण विकसित युद्ध (Full Scale War) के पक्ष में नहीं थे।
- शांति समझौते का समर्थन: पेजेश्कियान लगातार अमेरिका के साथ चल रही शांति वार्ता को एक मौका देना चाहते थे, ताकि देश पर लगे कड़े आर्थिक प्रतिबंधों को हटाया जा सके।
- IRGC का दबाव: दूसरी तरफ, ईरान का शक्तिशाली सैन्य संगठन IRGC और कट्टरपंथी धड़ा अमेरिका के खिलाफ आक्रामक सैन्य कार्रवाई और मिसाइल हमले करने पर अड़ा हुआ था। होर्मुज में अमेरिकी हमले के बाद सेना ने सरकार को दरकिनार करते हुए अपने सीक्रेट मिसाइल बंकर एक्टिव कर दिए। इस आंतरिक सत्ता संघर्ष (Power Struggle) और अपने फैसलों की अनदेखी से आहत होकर राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने पद छोड़ना ही बेहतर समझा।
सेना के हाथों में जा सकती है कमान, तख्तापलट की आशंका
राष्ट्रपति पेजेश्कियान के इस्तीफे के बाद ईरान में संवैधानिक संकट गहरा गया है और देश में अघोषित तख्तापलट (Military Coup) जैसी स्थिति बन गई है।
मार्शल लॉ का खतरा: लेकिन युद्ध की मौजूदा गंभीर स्थिति को देखते हुए यह आशंका जताई जा रही है कि सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई देश की कमान पूरी तरह से IRGC के जनरलों को सौंप सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो ईरान में पूरी तरह से सैन्य शासन या मार्शल लॉ लागू हो सकता है, जिससे अमेरिका के साथ जारी यह युद्ध और अधिक विनाशकारी रूप ले लेगा।
अस्थायी कमान: ईरान के संविधान के अनुसार, राष्ट्रपति का पद खाली होने पर देश के पहले उपराष्ट्रपति को सर्वोच्च नेता की मंजूरी के बाद अस्थायी कमान सौंपी जाती है, और 50 दिनों के भीतर नए चुनाव कराने होते हैं।
