दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। लोकसभा सचिवालय ने बुधवार को सभी 20 सांसदों को नोटिस जारी कर अभिषेक बनर्जी की ओर से दायर अयोग्यता याचिका पर जवाब मांगा है। सांसदों को अपना पक्ष रखने के लिए 7 दिन का समय दिया गया है। नोटिस 25 अगस्त को जारी किए गए हैं और इनके साथ बनर्जी की 18 जून को दाखिल की गई याचिका की कॉपी भी भेजी गई है।
यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के मंगलवार को अभिषेक बनर्जी की याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार होने के एक दिन बाद हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने 20 बागी सांसदों को नोटिस जारी किया था। हालांकि, लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय और सदन के महासचिव को औपचारिक नोटिस जारी नहीं किया गया।
20 सांसदों के खिलाफ अलग-अलग अयोग्यता याचिका
अभिषेक बनर्जी ने इन सांसदों के खिलाफ अलग-अलग अयोग्यता याचिकाएं दाखिल की थीं। इसके बाद उन्होंने मामले में जल्द कार्रवाई की मांग की। बनर्जी ने 27 जुलाई को लोकसभा अध्यक्ष को लिखित याद दिलाया था। वहीं 12 अगस्त को उन्होंने स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात भी की थी।
नोटिस पाने वाले सांसदों में काकोली घोष दस्तीदार, सुदीप बंद्योपाध्याय, शताब्दी रॉय, प्रसून बनर्जी, रचना बनर्जी, पार्थ भौमिक, सयानी घोष, यूसुफ पठान समेत 20 सांसद शामिल हैं।
17 जून को अलग गुट बनाने का ऐलान
विवाद की शुरुआत 17 जून को हुई, जब TMC के 20 सांसदों के गुट ने त्रिपुरा की नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी (NCPI) में विलय का ऐलान किया। बागी गुट ने लोकसभा में अलग समूह के रूप में मान्यता देने की मांग भी की है। उनका दावा है कि वे अब अलग राजनीतिक समूह के रूप में काम करेंगे और NDA के साथ रहेंगे।
वहीं TMC का कहना है कि ये सभी सांसद उसके चुनाव चिह्न पर चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे हैं। इसलिए किसी दूसरे राजनीतिक संगठन में शामिल होना दल-बदल कानून के दायरे में आता है। अब लोकसभा सचिवालय के नोटिस के बाद सांसदों के जवाब और आगे होने वाली कार्रवाई पर नजर रहेगी।
