Ram Avtar Jaggi Murder Case:छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित और 23 साल पुराने राम अवतार जग्गी हत्याकांड (Ram Avtar Jaggi Murder Case) में कानूनी खींचतान जारी है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को तत्काल राहत देने से साफ इनकार कर दिया है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट द्वारा दोषी करार दिए जाने और उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद अमित जोगी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अब इस पूरे मामले की अगली और अहम सुनवाई 23 अप्रैल 2026 को तय की गई है।
क्या है 2003 का राम अवतार जग्गी हत्याकांड?
यह राजनीतिक और आपराधिक घटना आज से 23 साल पहले की है, जिसने पूरे छत्तीसगढ़ में सनसनी फैला दी थी।
- साल 2003 में नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP) के नेता और तत्कालीन कोषाध्यक्ष राम अवतार जग्गी की बिलासपुर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। जग्गी उस समय दिग्गज नेता विद्याचरण शुक्ल के बेहद करीबी माने जाते थे।
- हत्या के बाद उनके बेटे सतीश जग्गी ने तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी और उनके बेटे अमित जोगी पर इस हत्याकांड का आरोप लगाया था।
- मामले की गंभीरता को देखते हुए साल 2004 में जांच सीबीआई (CBI) को सौंप दी गई थी।
- जांच के बाद सीबीआई ने अपनी सप्लीमेंट्री चार्जशीट में अमित जोगी को इस पूरे हत्याकांड का मास्टरमाइंड बताया था।
सीबीआई कोर्ट से बरी, हाईकोर्ट से मिली उम्रकैद
निचली अदालत में साल 2004 से 2007 तक चली लंबी सुनवाई के बाद एक बड़ा फैसला आया था।
- साल 2007 में विशेष सीबीआई कोर्ट ने इस मामले में 28 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, लेकिन मुख्य आरोपी बनाए गए अमित जोगी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था।
- इस फैसले से असंतुष्ट होकर मृतक के बेटे सतीश जग्गी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जहां से मामले को फिर से विचार करने के लिए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट भेज दिया गया।
- हाल ही में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाया। हाईकोर्ट ने अमित जोगी को मास्टरमाइंड मानते हुए दोषी करार दिया और आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए 3 हफ्ते के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया।
- हाईकोर्ट ने अपनी टिप्पणी में साफ कहा कि अमित जोगी तत्कालीन मुख्यमंत्री के बेटे होने के कारण प्रभावशाली स्थिति में थे और पुलिस मशीनरी पर उनका पूरा असर था। इतने बड़े स्तर की राजनीतिक साजिश बिना किसी बड़े संरक्षण के संभव नहीं थी।
अमित जोगी की दलील और सुप्रीम कोर्ट का रुख
हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ अमित जोगी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की।
- अमित जोगी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दलील दी गई कि उनके साथ अन्याय हुआ है। उनका दावा है कि हाईकोर्ट ने उनका पक्ष सुने बिना ही सीबीआई की अपील को स्वीकार कर लिया और महज 40 मिनट की सुनवाई में उनके खिलाफ फैसला सुना दिया।
- हालांकि, सोमवार को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें कोई भी फौरी राहत या स्टे देने से इनकार कर दिया।
अब सबकी नजरें 23 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि अमित जोगी को जेल जाना पड़ेगा या देश की सर्वोच्च अदालत से उन्हें कोई संजीवनी मिलेगी।
