ईरान के सिरिक में अमेरिकी हमले से पानी की सप्लाई ठप, खाड़ी देशों पर हमले की चेतावनी

US Iran War Sirik water crisis

US Iran War Sirik water crisis:तेहरान। जंग जब नागरिक जरूरतों को निशाना बनाने लगे तो संकट और भी गहरा हो जाता है। ईरान के दक्षिणी सिरिक क्षेत्र में हुए अमेरिकी हमलों में पानी के 2 बड़े टैंक नष्ट हो गए हैं। बामनी जिले में स्थित इन टैंकों के नष्ट होने से पूरे जिले में पीने के पानी की सप्लाई पूरी तरह ठप हो गई है। US Iran War Sirik water crisis ने अब मानवीय संकट का रूप लेना शुरू कर दिया है।

कैसे शुरू हुआ यह तनाव?

यह टकराव तब शुरू हुआ जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एक अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर गिराने का आरोप लगाया। अमेरिकी दावे के मुताबिक ईरानी ड्रोन ने यह हेलीकॉप्टर मार गिराया, हालांकि दोनों पायलट सुरक्षित बच गए। इसके जवाब में अमेरिका ने ईरान के हवाई रक्षा तंत्र, रडार केंद्रों और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरानी ठिकानों पर हमले किए। बंदर अब्बास और क्युशम द्वीप से भी धमाकों की खबरें आईं।

ईरान का जवाब और नई चेतावनी

ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने जॉर्डन में अमेरिकी अल-अजराक बेस पर लंबी दूरी की मिसाइलें दागीं। ईरान का दावा है कि F-35 लड़ाकू विमानों के हैंगर और कमांड सेंटर को निशाना बनाया गया। बहरीन में अमेरिकी 5वें बेड़े पर भी ड्रोन हमले किए गए। इसके साथ ही ईरान ने चेतावनी दी है कि खाड़ी देशों के डिसैलिनेशन इंफ्रास्ट्रक्चर को भी निशाना बनाया जा सकता है, जिन पर ये देश 90 प्रतिशत से ज्यादा पीने के पानी के लिए निर्भर हैं।

मानवाधिकार का सवाल

मुंबई स्थित ईरानी कॉन्सुलेट ने इन हमलों को मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि विदेशी सेनाओं को जोखिम से बचने के लिए यह क्षेत्र छोड़ देना चाहिए। अमेरिकी हमलों में एक टेलीकम्युनिकेशन टावर को भी नुकसान पहुंचने की खबर है। US Iran War Sirik water crisis ने अब खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति दोनों को लेकर दुनिया की चिंता बढ़ा दी है।