छत्तीसगढ़ विधानसभा (Chhattisgarh Assembly) के बजट सत्र की कार्यवाही में आज एक बड़ा और बहुचर्चित राष्ट्रीय मुद्दा छा गया। सदन में ‘National Herald issue’ (नेशनल हेराल्ड मामला) की गूंज सुनाई दी, जिसने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच एक तीखी राजनीतिक बहस छेड़ दी है। विपक्षी सदस्यों ने राज्य सरकार द्वारा इस प्रकाशन को दिए गए सरकारी विज्ञापनों (Government Advertisements) की भारी राशि को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी का सीधा आरोप लगाया।
National Herald issue: विज्ञापन राशि पर विपक्ष का हंगामा
विधानसभा की कार्यवाही के दौरान प्रश्नकाल में विपक्षी विधायकों ने राज्य के जनसंपर्क विभाग (Public Relations Department) के खर्चों पर सरकार को घेरने की कोशिश की। विपक्ष का मुख्य निशाना हाल ही में ‘National Herald issue’ से जुड़ी वह भारी-भरकम विज्ञापन राशि थी, जो कथित तौर पर राज्य सरकार द्वारा इस अखबार और उससे जुड़े संस्थानों को जारी की गई थी। विपक्षी नेताओं ने सदन में कड़े शब्दों में पूछा कि एक ऐसे प्रकाशन को, जो पहले से ही राष्ट्रीय स्तर पर विवादों और जांच एजेंसियों (Investigative Agencies) के घेरे में है, जनता की गाढ़ी कमाई का इतना बड़ा हिस्सा विज्ञापनों के रूप में क्यों दिया गया?
सरकार से मांगा गया विस्तृत जवाब
विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि विज्ञापन जारी करने के लिए तय किए गए सरकारी नियमों और मानकों (Parameters) की अनदेखी की गई है। उन्होंने संबंधित विभागीय मंत्री से पिछले कुछ वर्षों में नेशनल हेराल्ड को दिए गए विज्ञापनों का पूरा और विस्तृत विवरण (Detailed Report) सदन के पटल पर रखने की सख्त मांग की। विपक्ष ने इसे राजनीतिक फायदे के लिए सरकारी खजाने के दुरुपयोग का स्पष्ट मामला बताया।
सत्ता पक्ष का कड़ा बचाव और सदन में नोकझोंक
विपक्ष के इन गंभीर और तीखे आरोपों पर सत्ता पक्ष के मंत्रियों ने तुरंत पलटवार किया।
सरकार की ओर से जवाब देते हुए स्पष्ट किया गया कि सभी सरकारी विज्ञापन केवल तय सर्कुलेशन (Circulation) और जनसंपर्क विभाग की पारदर्शी नीतियों के आधार पर ही जारी किए जाते हैं। इसमें किसी भी तरह का कोई राजनीतिक पक्षपात या नियमों का उल्लंघन नहीं हुआ है। हालांकि, विपक्ष इस जवाब से पूरी तरह असंतुष्ट दिखा और सदन में काफी देर तक दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक (Heated Argument) होती रही।
