Chhattisgarh Naxalites surrender: सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी, कई खूंखार माओवादियों ने डाले हथियार

Security forces and police officials interacting with surrendered Naxalites in Chhattisgarh who have chosen to join the mainstream.

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में चलाए जा रहे पुलिस और सुरक्षाबलों के सघन नक्सल विरोधी अभियानों (Anti-Naxal Operations) को एक बार फिर बड़ी और ऐतिहासिक कामयाबी मिली है। राज्य सरकार की नीतियों और सुरक्षाबलों के लगातार बढ़ते दबाव के चलते ‘Chhattisgarh Naxalites surrender’ (नक्सलियों का आत्मसमर्पण) का एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसने माओवादी संगठन की कमर तोड़ कर रख दी है। कई इनामी और खूंखार नक्सलियों ने दशकों पुरानी हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा (Mainstream) में लौटने का अहम फैसला किया है।

Chhattisgarh Naxalites surrender: पुलिस के सामने डाले हथियार

बस्तर संभाग (Bastar Region) के अति-संवेदनशील और घने जंगलों वाले इलाकों में सक्रिय इन नक्सलियों ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के सामने अपने हथियार डाल दिए हैं। ताज़ा ‘Chhattisgarh Naxalites surrender’ अभियान के तहत आत्मसमर्पण करने वाले इन माओवादियों पर हत्या, पुलिस कैंपों पर हमलों और आईईडी (IED) ब्लास्ट जैसे कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज थे। इन शीर्ष नक्सलियों का संगठन छोड़ना पुलिस महकमे के लिए एक बहुत बड़ी रणनीतिक जीत मानी जा रही है।

पुनर्वास नीति (Rehabilitation Policy) का दिखा गहरा असर

आत्मसमर्पण करने वाले इन माओवादियों ने पूछताछ में बताया कि वे बड़े नक्सली नेताओं के खोखले आदर्शों, भेदभाव और स्थानीय आदिवासियों पर हो रहे अत्याचारों से पूरी तरह त्रस्त आ चुके थे। इसके अलावा, छत्तीसगढ़ सरकार की बेहद संवेदनशील ‘नक्सल उन्मूलन एवं पुनर्वास नीति’ (Rehabilitation Policy) और पुलिस के जागरूकता अभियानों ने उन्हें हिंसा का अंधकारमय मार्ग छोड़ने के लिए प्रेरित किया है। आत्मसमर्पित नक्सलियों को शासन के नियमानुसार तत्काल प्रोत्साहन राशि और जीवन-यापन के लिए अन्य सुविधाएं प्रदान की गई हैं।

नक्सल मुक्त (Naxal-Free) बस्तर की ओर बढ़ता कदम

लगातार हो रहे इन आत्मसमर्पणों और सुरक्षाबलों द्वारा मांद के भीतर नए पुलिस कैंपों (FOB) की स्थापना से लाल आतंक अब पूरी तरह से बैकफुट पर आ गया है। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि जो नक्सली हथियार छोड़कर मुख्यधारा में आएंगे, उनका स्वागत और पुनर्वास किया जाएगा। राज्य को नक्सल मुक्त बनाने की दिशा में यह एक बेहद सकारात्मक और निर्णायक कदम है।