Balrampur Digital Center:छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के बलरामपुर जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जो सरकारी निर्माण कार्यों में चल रहे भ्रष्टाचार की पोल खोलता है। डिजिटल इंडिया के सपने को साकार करने के लिए जिले में एक आधुनिक ‘डिजिटल सेंटर’ (Digital Center) भवन का निर्माण किया जा रहा है। लेकिन, इस लाखों रुपये की लागत वाली इमारत के तैयार होने से पहले ही इसकी निर्माण गुणवत्ता (Building Quality) सवालों के घेरे में आ गई है। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत से निर्माण कार्य में खुलेआम घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है।
घटिया ईंट और सीमेंट के इस्तेमाल का आरोप
हमारी ग्राउंड रिपोर्ट और स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस डिजिटल सेंटर को ग्रामीण युवाओं को तकनीक से जोड़ने के लिए एक बड़े प्रोजेक्ट के तौर पर स्वीकृत किया गया था।
- मौके पर मौजूद ग्रामीणों का आरोप है कि भवन की नींव और दीवारों को खड़ा करने के लिए जिस ईंट और सीमेंट का इस्तेमाल किया जा रहा है, वह बेहद दोयम दर्जे का है।
- निर्माण स्थल पर रखे मटेरियल को देखकर साफ पता चलता है कि मानकों की अनदेखी की जा रही है।
- हल्की बारिश और सामान्य मौसम में ही दीवारों पर दरारें (Cracks) उभरने लगी हैं, जो एक नए भवन के लिए खतरे की घंटी है।
- सीमेंट और रेत का अनुपात भी तय मानकों के अनुसार नहीं रखा जा रहा है, जिससे बिल्डिंग की मजबूती पूरी तरह से खतरे में पड़ गई है।
अधिकारियों की चुप्पी और ग्रामीणों का आक्रोश
इस पूरे मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। निर्माण में हो रही धांधली को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर है।
- स्थानीय लोगों ने कई बार ठेकेदार और साइट सुपरवाइजर से इसकी शिकायत की, लेकिन उनकी एक नहीं सुनी गई।
- इसके बाद ग्रामीणों ने जिले के आला अधिकारियों और संबंधित विभाग को ज्ञापन सौंपकर निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
- हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े आरोप लगने के बावजूद प्रशासनिक अधिकारी फिलहाल इस मामले पर कुछ भी स्पष्ट बोलने से बच रहे हैं। उनकी यह चुप्पी मिलीभगत के संदेह को और गहरा कर रही है।
क्या होगी निष्पक्ष जांच?
सरकारी खजाने से लाखों रुपये खर्च कर यह डिजिटल सेंटर इसलिए बनाया जा रहा था ताकि बलरामपुर के दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चे कंप्यूटर और इंटरनेट की दुनिया से जुड़ सकें। लेकिन भ्रष्टाचार की दीमक ने इस सपने को शुरुआत में ही खोखला करना शुरू कर दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि बलरामपुर जिला प्रशासन (Balrampur Administration) ग्रामीणों की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए क्या ठेकेदार के खिलाफ कोई ठोस और निष्पक्ष जांच बिठाता है, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
