Chhattisgarh RTE Admission:छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में शिक्षा का अधिकार यानी आरटीई (RTE) के तहत गरीब बच्चों के दाखिले को लेकर राज्य सरकार और प्राइवेट स्कूलों के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार ने निजी स्कूलों की मनमानी पर अब बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। सरकार ने साफ चेतावनी दी है कि जो भी निजी स्कूल आरटीई के 25 प्रतिशत कोटे के तहत बच्चों को एडमिशन देने में आनाकानी करेगा, उसकी मान्यता (Recognition) तक रद्द कर दी जाएगी। लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने इस संबंध में सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी कर दिए हैं।
प्राइवेट स्कूलों का असहयोग आंदोलन और मांगें
दरअसल, छत्तीसगढ़ के प्राइवेट स्कूलों ने फीस प्रतिपूर्ति (Reimbursement) की राशि बढ़ाने की मांग को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है।
- छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन का कहना है कि जब तक सरकार आरटीई के तहत प्रति छात्र दी जाने वाली राशि को बढ़ाकर 22000 रुपये नहीं कर देती, तब तक वे नए एडमिशन नहीं लेंगे।
- अपनी इसी मांग को लेकर राज्य के लगभग 6000 से ज्यादा निजी स्कूलों ने आरटीई के तहत प्रवेश प्रक्रिया का बहिष्कार कर दिया है।
- एसोसिएशन ने स्कूल शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर अपनी समस्याओं से अवगत कराया है, लेकिन सरकार उनकी इस जिद्द के आगे झुकने को तैयार नहीं है।
14000 बच्चों का भविष्य दांव पर, DPI का कड़ा एक्शन
इस पूरे विवाद के बीच सबसे ज्यादा नुकसान उन गरीब और जरूरतमंद बच्चों का हो रहा है, जो आरटीई के तहत अच्छे स्कूलों में पढ़ने का सपना देखते हैं।
सरकार का स्पष्ट संदेश है कि शिक्षा के अधिकार कानून का पालन करना हर स्कूल की कानूनी बाध्यता है। बच्चों के अधिकारों से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। जो स्कूल आदेश नहीं मानेंगे, उनकी मान्यता बिना किसी देरी के रद्द कर दी जाएगी।
एडमिशन प्रक्रिया रुकने से प्रदेश भर के करीब 14000 बच्चों का भविष्य अधर में लटक गया है।
इस स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार एक्शन मोड में आ गई है। डीपीआई (DPI) ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) से उन निजी स्कूलों की तत्काल सूची मांगी है जो दाखिला देने में सहयोग नहीं कर रहे हैं।
