US Iran War Trump:अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब अपने चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को अब तक की सबसे बड़ी और सख्त चेतावनी दे दी है। इस अल्टीमेटम को कूटनीतिक हलकों में ‘डील या तबाही’ (Deal or Destroy) का नाम दिया जा रहा है, जिससे मिडिल ईस्ट (Middle East) सहित पूरी दुनिया में युद्ध की आशंकाएं गहरी हो गई हैं।
29 बिलियन डॉलर का पेंच
इस पूरे विवाद के केंद्र में 29 बिलियन डॉलर की भारी-भरकम राशि है। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के अनुसार, यह रकम ईरान के उन विदेशी फंड्स या संभावित आर्थिक प्रतिबंधों से जुड़ी है, जिस पर अमेरिका ने अपना कड़ा रुख अख्तियार किया है।
- ट्रंप प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान को या तो अमेरिका की शर्तों पर एक नई और सख्त परमाणु व सामरिक ‘डील’ माननी होगी, या फिर उसे गंभीर आर्थिक और सैन्य ‘तबाही’ का सामना करना पड़ेगा।
- यह 29 बिलियन डॉलर का दबाव ईरान की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से पंगु बनाने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
कूटनीतिक तनाव और वैश्विक असर
ट्रंप की इस चेतावनी ने वैश्विक बाजारों में भी खलबली मचा दी है।
- कच्चे तेल पर असर: मिडिल ईस्ट में किसी भी तरह के सैन्य टकराव की आशंका से ग्लोबल सप्लाई चेन प्रभावित होने का डर है, जिसका सीधा असर कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों पर पड़ सकता है।
- ग्लोबल राजनीति: ट्रंप के इस आक्रामक रुख को चीन और रूस भी करीब से देख रहे हैं। हाल ही में ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद, ईरान पर इस तरह का दबाव अमेरिका की एक बड़ी कूटनीतिक चाल मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अगले कुछ दिनों में ईरान ने अमेरिका की शर्तों के आगे घुटने नहीं टेके, तो खाड़ी क्षेत्र में एक विनाशकारी युद्ध छिड़ सकता है जो विश्व अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचाएगा।
