Arvind Panagariya RBI advice on Rupee:नई दिल्ली। भारतीय रुपये (Indian Rupee) में डॉलर (US Dollar) के मुकाबले आ रही गिरावट और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष और प्रमुख अर्थशास्त्री अरविंद पनगढ़िया (Arvind Panagariya) ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) को एक बेहद अहम और दो टूक सलाह दी है। उनका स्पष्ट मानना है कि केंद्रीय बैंक को रुपये की गिरावट में फिलहाल हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
‘100 का स्तर सिर्फ एक नंबर है’
अरविंद पनगढ़िया ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि एक डॉलर के बराबर 100 रुपये के मनोवैज्ञानिक स्तर को नीति निर्धारण का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए।
- गिरावट है जरूरी: उन्होंने लिखा, “100 भी बस एक संख्या है, ठीक 99 और 101 की तरह। कच्चे तेल की कमी चाहे अल्पकालिक हो या दीर्घकालिक, इस समय रुपये को अपने स्तर पर स्वाभाविक रूप से गिरने देना ही सबसे सही नीति है।”
तेल संकट और विदेशी मुद्रा भंडार पर राय
पनगढ़िया ने आर्थिक दृष्टिकोण से स्थिति को समझाते हुए कई अहम बातें स्पष्ट कीं:
- विदेशी मुद्रा भंडार न करें खर्च: उन्होंने कहा कि रुपये को कृत्रिम रूप से बचाने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) को खर्च करना एक बेकार और घाटे का सौदा साबित होगा, क्योंकि इसका कोई स्थायी फायदा नहीं है।
- विदेशी निवेश की उम्मीद: यदि कच्चे तेल की कमी कुछ महीनों तक रहती है, तो शुरुआती कमजोरी के बाद रुपये में वापसी होगी। इस दौरान विदेशी निवेशक ‘सस्ते’ रुपये का फायदा उठाकर भारत में अपना निवेश बढ़ा सकते हैं।
- अस्थायी उपायों से बचें: उन्होंने डॉलर में बॉन्ड जारी करने या ऊंची ब्याज दरों पर एनआरआई (NRI) जमा स्वीकार करने जैसे अस्थायी राहत उपायों को भी खारिज कर दिया। उनका मानना है कि इनसे प्राप्त विदेशी मुद्रा पर चुकाया जाने वाला ब्याज, मिलने वाले लाभ से कहीं ज्यादा होगा।
2013 जैसे नहीं हैं मौजूदा हालात
पनगढ़िया ने यह भी स्पष्ट किया कि आज की स्थिति 2013 के ‘टेपर टैंट्रम’ जैसी नहीं है, जब देश में मुद्रास्फीति (Inflation) दोहरे अंकों में थी। आज भारतीय अर्थव्यवस्था काफी मजबूत है और रुपये के अवमूल्यन से आने वाले मुद्रास्फीति के दबाव को आसानी से सहन कर सकती है।
क्या है रुपये की मौजूदा स्थिति?
विदेशी मुद्रा बाजार में गुरुवार को रुपये ने अपने सर्वकालिक निचले स्तर से उबरते हुए 50 पैसे की शानदार रिकवरी दर्ज की।
इससे पहले बुधवार को यह 96.86 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि भू-राजनीतिक तनाव में कमी के शुरुआती संकेतों और केंद्रीय बैंक के संभावित हस्तक्षेप की उम्मीद ने रुपये को सहारा दिया है।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर के मुकाबले रुपया 96.36 पर बंद हुआ।
