Indian Rupee Fall Explained:नई दिल्ली। भारतीय मुद्रा (Indian Rupee) के लिए विदेशी मुद्रा बाजार (Forex Market) से बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। भारतीय रुपया न केवल अमेरिकी डॉलर (US Dollar) के मुकाबले अपने सर्वकालिक निचले स्तर पर पहुंच गया है, बल्कि पड़ोसी देश पाकिस्तान की मुद्रा (Pakistani Rupee – PKR) और अन्य एशियाई मुद्राओं के सामने भी इसमें भारी गिरावट दर्ज की गई है।
डॉलर के मुकाबले 96 के पार पहुंचा रुपया
वैश्विक तनाव और मजबूत होते डॉलर के दबाव में भारतीय रुपया पहली बार 96 रुपये प्रति डॉलर के पार चला गया है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर 96.20 प्रति डॉलर पर आ गया है। अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से रुपये में करीब 5.5% की गिरावट आ चुकी है।
पाकिस्तानी रुपये (PKR) और एशियाई मुद्राओं के सामने खराब प्रदर्शन
अर्थशास्त्रियों के लिए सबसे बड़ी हैरानी की बात यह है कि रुपया पाकिस्तानी मुद्रा के मुकाबले भी तेजी से गिरा है।
- PKR के मुकाबले गिरावट: पिछले 12 महीनों में पाकिस्तानी रुपये (PKR) के मुकाबले भारतीय रुपये में लगभग 11.86% की गिरावट आई है। मई 2025 में जो विनिमय दर 3.29 INR प्रति PKR थी, वह अब मई 2026 में गिरकर 2.90 INR प्रति PKR पर आ गई है।
- बांग्लादेशी टका: इसी अवधि में रुपया बांग्लादेशी टका (Taka) के मुकाबले भी लगभग 10% कमजोर हुआ है।
- साल 2025 से लेकर मौजूदा साल तक, भारतीय रुपया एशिया की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्रा (Worst Performing Currency in Asia) बन गया है।
क्यों आ रही है रुपये में इतनी बड़ी गिरावट?
इस ऐतिहासिक गिरावट के पीछे वैश्विक और घरेलू दोनों तरह के कारक जिम्मेदार माने जा रहे हैं:
- वैश्विक तनाव और कच्चा तेल: अमेरिका-ईरान युद्ध और मध्य पूर्व संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें (Crude Oil Prices) लगातार बढ़ रही हैं। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ रहा है।
- मजबूत अमेरिकी नीतियां: अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Fed) की सख्त नीतियों के कारण विदेशी निवेशक भारत जैसे उभरते बाजारों से अपना पैसा निकालकर सुरक्षित अमेरिकी बॉन्ड्स में निवेश कर रहे हैं (Foreign Outflow)।
- घरेलू नीतियां: आर्थिक जानकारों का मानना है कि केवल वैश्विक कारणों को दोष नहीं दिया जा सकता, क्योंकि अन्य एशियाई मुद्राएं इतनी नहीं गिरी हैं। पाकिस्तान का IMF प्रोग्राम में शामिल होना और भारत की कुछ संरचनात्मक आर्थिक चुनौतियां भी इस गिरावट का एक बड़ा कारण हैं।
आम आदमी पर क्या होगा असर?
रुपये के कमजोर होने का सीधा असर भारत में बढ़ती महंगाई (Inflation) के रूप में दिखेगा। विदेशों से आयात होने वाला सामान— जैसे कच्चा तेल, खाने का तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स, और मोबाइल फोन— महंगा हो जाएगा। विदेश में पढ़ाई करने वाले छात्रों और यात्रा करने वालों के लिए भी खर्च बढ़ जाएगा, जिससे मध्यवर्गीय परिवारों की जेब पर भारी बोझ पड़ेगा।
