RBI Risk Buffer:दुनिया भर में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश की अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। मध्य पूर्व (Middle East) में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में संभावित उछाल के खतरे को भांपते हुए, केंद्रीय बैंक ने अपनी आर्थिक सुरक्षा (Economic Security) को और मजबूत कर लिया है। इसके तहत, आरबीआई ने अपने कंटीजेंसी रिस्क बफर (Contingent Risk Buffer – CRB) में पिछले साल के मुकाबले दोगुने से भी अधिक रकम डाली है।
रिस्क बफर में भारी बढ़ोतरी
आरबीआई के केंद्रीय निदेशक मंडल ने वित्तीय वर्ष 2025-26 (FY26) के लिए कंटीजेंसी रिस्क बफर को लेकर एक अहम फैसला लिया है:
- दोगुना हुआ आवंटन: रिजर्व बैंक ने आकस्मिक जोखिमों से निपटने के लिए बनाए गए इस फंड (CRB) में इस साल 1,09,379.64 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए हैं।
- पिछले साल से तुलना: यह रकम पिछले वित्तीय वर्ष (FY25) में ट्रांसफर किए गए 44,861.70 करोड़ रुपये के मुकाबले दोगुने से भी काफी ज्यादा है।
- क्या है वजह: जानकारों के मुताबिक, वेस्ट एशिया के संकट, ग्लोबल बॉन्ड और करेंसी मार्केट में भारी उतार-चढ़ाव को देखते हुए यह कदम उठाया गया है, ताकि किसी भी बाहरी झटके से देश की अर्थव्यवस्था को बचाया जा सके।
6.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा गया बफर
इतनी बड़ी रकम ट्रांसफर करने के बावजूद, आरबीआई ने कुल बैलेंस शीट के मुकाबले रिस्क बफर का अनुपात 6.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। आपको बता दें कि आरबीआई की बैलेंस शीट में 20.61 प्रतिशत का बड़ा उछाल आया है और यह 31 मार्च 2026 तक बढ़कर 91,97,121.08 करोड़ रुपये हो गई है। बढ़ी हुई बैलेंस शीट के कारण 6.5% के स्तर को बनाए रखने के लिए ही रिस्क बफर में इतनी बड़ी रकम डालनी पड़ी है। नियम के मुताबिक इस बफर को 4.5% से 7.5% के बीच रखा जाना होता है।
सरकार को रिकॉर्ड 2.87 लाख करोड़ का लाभांश
सुरक्षा बफर को मजबूत करने के साथ-साथ रिजर्व बैंक ने केंद्र सरकार को भी बड़ी राहत दी है। आरबीआई ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए सरकार को 2.86 लाख करोड़ रुपये (लगभग 2.87 लाख करोड़) के रिकॉर्ड सरप्लस ट्रांसफर (लाभांश) को मंजूरी दी है। यह लाभांश ऐसे समय में सरकार के लिए संजीवनी का काम करेगा, जब ईंधन और उर्वरक सब्सिडी के बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है।
कुल मिलाकर, आरबीआई का यह कदम इस बात का साफ संकेत है कि भारत किसी भी संभावित वैश्विक झटके (Global Crises) का सामना करने के लिए पहले से ही अपनी आर्थिक ढाल मजबूत कर चुका है।
