Putin on Dollar Dominance:मॉस्को/सेंट पीटर्सबर्ग। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम में पश्चिमी देशों और उनकी वित्तीय प्रणालियों की कड़ी आलोचना की है। पुतिन ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी डॉलर और यूरो का वैश्विक दबदबा अब खत्म हो रहा है और ब्रिक्स देश डॉलर के बजाय अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार कर रहे हैं। पुतिन ने ब्रिक्स देशों की बढ़ती आर्थिक ताकत का हवाला देते हुए इसे दुनिया में आ रहे एक बड़े बदलाव का संकेत बताया।
डॉलर से क्यों मोहभंग कर रहे हैं देश?
पुतिन के अनुसार पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों और रूस के विदेशी मुद्रा भंडार को फ्रीज करने जैसी कार्रवाइयों ने दुनिया भर के देशों को डरा दिया है और व्यवस्था की खामियों को उजागर कर दिया है।
- भरोसे का टूटना: रूस पर लगे प्रतिबंधों के कारण डॉलर और यूरो जैसी अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं पर से देशों का विश्वास हमेशा के लिए उठ गया है। देशों को डर है कि पश्चिमी वित्तीय ढांचे पर निर्भर रहने से उनके एसेट्स भी कभी भी फ्रीज किए जा सकते हैं।
- राष्ट्रीय मुद्राओं की ओर झुकाव: इस अविश्वास के कारण ब्रिक्स और ग्लोबल साउथ के देश डॉलर को छोड़कर अपनी-अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं में लेन-देन कर रहे हैं।
- वैकल्पिक प्रणालियों का विकास: ब्रिक्स देश पुरानी वित्तीय प्रणाली के विकल्प के रूप में नया पेमेंट सिस्टम और सेंट्रल बैंकों की डिजिटल करेंसी विकसित करने पर जोर दे रहे हैं।
जी7 से काफी आगे निकल चुका है ब्रिक्स
पुतिन ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में ब्रिक्स की बढ़ती ताकत के आंकड़े सामने रखे और इसे भविष्य की आर्थिक वृद्धि का मुख्य इंजन बताया।
- आर्थिक विकास में योगदान: पिछले पांच वर्षों में वैश्विक जीडीपी ग्रोथ में ब्रिक्स देशों का योगदान उनचास प्रतिशत रहा है, जबकि जी7 देशों का हिस्सा मात्र अठारह प्रतिशत रहा है।
- क्रय शक्ति में भारी बढ़त: क्रय शक्ति के आधार पर वैश्विक जीडीपी में ब्रिक्स की हिस्सेदारी अब चालीस प्रतिशत हो गई है, जबकि जी7 बीस प्रतिशत से भी नीचे खिसक गया है। पुतिन ने जोर देकर कहा कि ब्रिक्स ने साल दो हजार बीस में ही जी7 को पीछे छोड़ दिया था।
- भविष्य का अनुमान: जहां ब्रिक्स देशों की अर्थव्यवस्थाएं सालाना चार प्रतिशत से ज्यादा की दर से बढ़ेंगी, वहीं जी7 देशों की विकास दर केवल एक दशमलव एक प्रतिशत के आसपास रहने का अनुमान है।
पुतिन का यह बयान साफ इशारा करता है कि वैश्विक व्यापार का केंद्र अब तेजी से पश्चिम से पूर्व और दक्षिण की ओर शिफ्ट हो रहा है। रूस और उसके सहयोगी देश डॉलर के प्रभुत्व को खत्म करने और एक नई बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था बनाने के लिए लगातार आगे बढ़ रहे हैं।
