इंटरनेट प्रोवाइडर अब ग्राहकों के प्रति बनेंगी जवाबदेह

नई दिल्ली। इंटरनेट सर्विस देने वाली कंपनियां अब ग्राहकों के प्रति अपनी जवाबदेही से बच नहीं पाएंगी। टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी ट्राई ने ‘दूरसंचार उपभोक्ता शिकायत निवारण (चौथा संशोधन) विनियम, 2026’ जारी किया है। इसका मकसद यूजर्स की शिकायतों पर होने वाली कार्रवाई को फास्ट, आसान और असरदार बनाना है। ट्राई के नए नियम उन सभी इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स पर लागू होंगे जिनके पास 10 हजार से अधिक सब्सक्राइबर्स हैं। यानी जियो-एयरटेल समेत छोटी इंटरनेट कंपनियों को भी ग्राहकों की शिकायतों पर तेजी से काम करना होगा।

इंटरनेट चलाने वाले ग्राहकों को होंगे ये फायदे
जानकारी के अनुसार, अब ग्राहक- कॉल सेंटर, वेबसाइट और पोर्टल के अलावा सीधे कंपनी के मोबाइल ऐप से भी अपनी शिकायत और अपील दर्ज करा सकेंगे।
ग्राहकों को मिलने वाली मदद अब रोजाना 16 घंटे के बजाय 24 घंटे और सातों दिन उपलब्ध होगी।
ग्राहकों की समस्या सुनने के लिए कंपनियां AI एजेंट, ऑटोमेटेड सिस्टम या इंसानी प्रतिनिधि तीनों की मदद ले सकेंगी।
इसमें खास यह है कि इंसानी प्रतिनिधि यानी कस्टमर सपोर्ट पर बैठे व्यक्तियों को दिन में कम से कम 16 घंटे मौजूद रहना होगा।
इसे और आसान भाषा में समझें तो जब ग्राहक कस्टमर केयर पर अपनी शिकायत देंगे, तब उन्हें ज्यादातर बार कोई इंसान कॉल पर मिलेगा जो उनकी दिक्कत को समझेगा।

दिव्यांगों के लिए खास सुविधाएं
इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स कंपनियों को दिव्यांगजनों के लिए विशेष हेल्पडेस्क लगानी होगी। उन्हें अपने मोबाइल ऐप, वेबसाइट और पोर्टल को भारत सरकार की दिव्यांगजनों के लिए जारी की गई गाइडलाइंस के अनुसार तैयार करना होगा।

30 दिन की जगह 15 दिन में निपटेगी शिकायत
ग्राहकों की शिकायत निपटाने में कंपनियां पहले 30 दिन लगा देती थीं। अब उन्हें 15 दिन के अंदर कंप्लेंट पर काम करना होगा।
शिकायत निपटाने के बाद कंपनियां ग्राहकों से 1 से 5 रेटिंग वाला फीडबैक लेंगी। इसमें पता चलने वाली बातों को कंपनियों को अपनी वेबसाइट पर हर तीन महीने में बताना होगा।
यानी यह पता चल पाएगा कि कौन सी कंपनी अपने ग्राहकाें की शिकायतें निपटाने में आगे हैं और ग्राहक उससे कितना संतुष्ट हैं।
इसके साथ ही, कंपनियों को शिकायतों, अपीलों और ग्राहकों के फीडबैक की रिपोर्ट हर तिमाही अपने CEO या बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के सामने रखनी होगी, ताकि टॉप लेवल पर इसकी मॉनिटरिंग हो पाए।
खास यह है कि नियम नहीं मानने वाली कंपनियों पर ट्राई जुर्माना भी लगाएगा।