Strait of Hormuz: ईरान ने खोला होर्मुज स्ट्रेट का रास्ता, जानिए भारत की ऊर्जा और व्यापार के लिए इसके क्या हैं मायने

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वैश्विक ऊर्जा संकट और खाड़ी देशों में चल रहे भारी तनाव के बीच दुनिया भर के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। लेबनान और इजरायल के बीच सीजफायर की घोषणा होने के तुरंत बाद, ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को व्यापारिक जहाजों की आवाजाही के लिए सुरक्षित रूप से खोलने का ऐलान कर दिया है। ईरान की इस्लामिक सरकार के इस फैसले से वैश्विक व्यापार और खास तौर पर भारत को एक बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

सीजफायर के बाद ईरान का ऐलान, ट्रंप का इनकार

दरअसल, 28 फरवरी को तेहरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद से ईरान ने इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते को बंद कर दिया था।

  • ईरान ने तब जहाजों को चेतावनी दी थी और एक जहाज पर हमला भी किया था, जिसके बाद से यहां से गुजरना बेहद खतरनाक हो गया था।
  • हालांकि, अब तेहरान की तरफ से कहा गया है कि सीजफायर की अवधि तक होर्मुज सभी के लिए खुला हुआ है।
  • इसके विपरीत, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज पर लगे अमेरिकी ब्लॉकेड को हटाने से साफ इनकार कर दिया है।
  • ट्रंप का कहना है कि जब तक ईरान के साथ कोई स्थायी शांति समझौता नहीं हो जाता, तब तक अमेरिका अपनी तरफ से यह नाकेबंदी जारी रखेगा।

भारत की ऊर्जा जरूरतों और व्यापार पर असर

होर्मुज के खुलने से ऊर्जा संकट के मुहाने पर बैठी दुनिया के साथ-साथ भारत को भी एक बड़ी संजीवनी मिली है।

  • खाड़ी क्षेत्र से भारत की ऊर्जा जरूरत का एक बहुत बड़ा हिस्सा पूरा होता है। इस रास्ते के बंद होने से वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें आसमान छूने लगी थीं।
  • इसके अलावा, होर्मुज के फिर से खुलने से अब कच्चे तेल की कीमतों में धीरे-धीरे कमी आने के आसार हैं, जिससे घरेलू स्तर पर पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतें कम हो सकती हैं।
  • वहीं, व्यापारिक दृष्टिकोण से भी यह भारत के लिए एक बड़ी जीत है। खाड़ी क्षेत्र में फंसे भारतीय जहाज अब जल्द ही देश वापस आ सकेंगे।
  • महाराष्ट्र के केला किसानों जैसे निर्यातकों को, जो इस रास्ते के बंद होने के कारण अपनी फसलों के सही दाम नहीं ले पा रहे थे, उन्हें भी अब भारी राहत मिलेगी।

पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं हालात

इस खुशखबरी के बावजूद, विशेषज्ञों का मानना है कि हालात अभी भी पूरी तरह से सामान्य नहीं हुए हैं। जब तक अमेरिका और ईरान के बीच कोई ठोस शांति समझौता नहीं हो जाता, तब तक यह रास्ता सौ फीसदी सुरक्षित नहीं माना जा सकता। शिपिंग कंपनियों को अभी भी जहाजों के बीमे के लिए भारी फीस चुकानी पड़ सकती है। जानकारों का कहना है कि अगर होर्मुज अपनी पूरी क्षमता के साथ भी काम करना शुरू कर देता है, तब भी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को पूरी तरह से सामान्य होने में करीब 6 महीने से ज्यादा का वक्त लग सकता है।