भारत के पहले प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट ‘विक्रम-1’ की लॉन्चिंग टली: काउंटडाउन 5 मिनट पहले रोका, दोबारा होगी लॉन्च प्रक्रिया

दिल्ली। भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए शनिवार का दिन ऐतिहासिक माना जा रहा है। हैदराबाद की स्काईरूट एयरोस्पेस ने अपने पहले प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट ‘विक्रम-1’ की लॉन्चिंग श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से तय की थी।

हालांकि, सुबह 11:30 बजे प्रस्तावित लॉन्च से महज पांच मिनट पहले काउंटडाउन रोक दिया गया। कंपनी के मुताबिक, कुछ तकनीकी जांच के बाद ऑटोमैटिक लॉन्च सिक्वेंस दोबारा शुरू किया जाएगा।

इस मिशन को ‘मिशन आगमन’ नाम दिया गया है। विक्रम-1 भारत का पहला निजी ऑर्बिटल रॉकेट है, जिसे पृथ्वी की 450×450 किलोमीटर की लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में पेलोड स्थापित करने के लिए तैयार किया गया है।

लॉन्च के दौरान इसरो के वैज्ञानिक भी मौजूद हैं। वहीं, इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन जाने वाले भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला भी इस ऐतिहासिक मिशन के साक्षी बनने श्रीहरिकोटा पहुंचे।

विक्रम-1 पूरी तरह हल्के और मजबूत कार्बन-कंपोजिट ढांचे से बना है। इसमें तीन सॉलिड-फ्यूल स्टेज और एक लिक्विड ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल लगाया गया है, जो सैटेलाइट को तय कक्षा में स्थापित करने में मदद करेगा। यह रॉकेट करीब 350 किलोग्राम तक का पेलोड लो अर्थ ऑर्बिट में पहुंचाने में सक्षम है।

मिशन के तहत टेक्नोलॉजी और कॉमर्शियल पेलोड्स के साथ एक विशेष 18 कैरेट सोने से बना माइक्रो-आर्ट रॉकेट भी अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। इस कलाकृति पर डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम, डॉ. विक्रम साराभाई और नोबेल विजेता सी.वी. रमन की सूक्ष्म आकृतियां उकेरी गई हैं।

स्काईरूट एयरोस्पेस की स्थापना 2018 में पवन कुमार चंदना और नागा भरत डाका ने की थी। कंपनी ने 2022 में देश का पहला निजी सबऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-एस सफलतापूर्वक लॉन्च किया था। विक्रम-1 की सफल उड़ान भारत के निजी स्पेस सेक्टर को वैश्विक लॉन्च मार्केट में नई पहचान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।