Mati Pujan Diwas Chhattisgarh:अक्षय तृतीया पर छत्तीसगढ़ में माटी पूजन दिवस: मुख्यमंत्री साय ने खेत में हल चलाकर की सुख-समृद्धि की कामना

Mati Pujan Diwas Chhattisgarh

Mati Pujan Diwas Chhattisgarh:छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर समेत पूरे प्रदेश में आज अक्षय तृतीया का पर्व बड़े ही हर्षोल्लास और पारंपरिक श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। इस विशेष अवसर पर राज्य सरकार द्वारा माटी पूजन दिवस का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस पावन दिन पर धरती माता के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट करते हुए खेतों में हल चलाया और विधिवत पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री ने इस दौरान प्रदेश की जनता की खुशहाली और बेहतर कृषि पैदावार के लिए प्रार्थना की।

माटी पूजन दिवस का मुख्य उद्देश्य मिट्टी की उर्वरता की रक्षा करना और जैविक खेती को बढ़ावा देना है। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में मिट्टी के स्वास्थ्य के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि हमारी धरती मां हमें अन्न और जीवन प्रदान करती है, इसलिए इसकी रक्षा करना हम सभी का नैतिक कर्तव्य है। उन्होंने किसानों से रसायनों का उपयोग कम करने और पारंपरिक कृषि पद्धतियों को अपनाने का आह्वान किया।

अक्षय तृतीया के शुभ मुहूर्त पर छत्तीसगढ़ में पुत्र-पुत्री (पुतरा-पुतरी) विवाह की भी प्राचीन परंपरा निभाई जा रही है। घर-घर में छोटे बच्चों द्वारा मिट्टी के गुड्डा-गुड़िया का विवाह रचाया जा रहा है, जो ग्रामीण संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों के संरक्षण का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को अक्ती पर्व की बधाई देते हुए इस परंपरा को हमारी सांस्कृतिक धरोहर का अभिन्न अंग बताया।

इस अवसर पर कृषि विभाग द्वारा विशेष जागरूकता अभियानों का संचालन किया जा रहा है ताकि मिट्टी परीक्षण और उचित पोषण प्रबंधन के प्रति किसानों को जागरूक किया जा सके। माटी पूजन दिवस के माध्यम से सरकार यह संदेश दे रही है कि पर्यावरण और प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर ही हम एक समृद्ध भविष्य का निर्माण कर सकते हैं।

आयोजन के दौरान प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आए किसान और जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे। सामूहिक शपथ के माध्यम से धरती की रक्षा और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया गया। अक्षय तृतीया की यह सुबह छत्तीसगढ़ के लिए केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि मिट्टी से जुड़ने और कृषि प्रधान संस्कृति को गौरवान्वित करने का एक बड़ा माध्यम बनकर उभरी है।

मुख्यमंत्री की इस पहल को ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक सराहना मिल रही है, क्योंकि यह सीधे तौर पर किसान और जमीन के जुड़ाव को दर्शाता है।