Petrol-Diesel Price: कच्चा तेल 80 डॉलर तक गिरा, तो क्या अब भारत में पेट्रोल-डीजल होगा सस्ता? समझें पूरा गणित

Petrol Diesel Price After Crude Oil Fall

अमेरिका (US) और ईरान (Iran) के बीच ऐतिहासिक शांति समझौते की खबर आते ही ग्लोबल कमोडिटी बाजार में बड़ी राहत देखने को मिल रही है। पिछले 3-4 महीनों से उबल रहा कच्चा तेल (Crude Oil) अब तेजी से शांत होने लगा है।

ताजा आंकड़ों के मुताबिक, आज डब्ल्यूटीआई क्रूड (WTI Crude) का भाव 5.02% की भारी-भरकम गिरावट के साथ 80.62 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया है। वहीं, ग्लोबल बेंचमार्क माना जाने वाला ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) भी 4.57% की कमजोरी के साथ 83.34 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है। ऐसे में भारतीय उपभोक्ताओं के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अब देश में पेट्रोल और डीजल (Petrol-Diesel) के दाम कम होंगे? आइए इसका पूरा गणित समझते हैं।

होर्मुज स्ट्रेट खुलने से आई कच्चे तेल में नरमी

अमेरिका और ईरान के बीच हुई इस डील के बाद दुनिया के सबसे संवेदनशील तेल सप्लाई रूट ‘होर्मुज स्ट्रेट’ (Strait of Hormuz) के जल्द खुलने की उम्मीद है।

  • यह अहम व्यापारिक रूट फरवरी 2026 से ही इजरायल-ईरान तनाव के बाद से बंद पड़ा था।
  • अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के उप विदेश मंत्री ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि इस डील पर शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर होंगे, जिसके तुरंत बाद तेल की सप्लाई सुचारू रूप से शुरू हो जाएगी।

क्या है भारत में पेट्रोल-डीजल सस्ता होने का ‘गणित’?

सिद्धांत (Theory) के अनुसार तो भारत में पेट्रोल और डीजल सस्ता होना चाहिए। भारत अपनी जरूरत का करीब 85% से अधिक कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है।

एक्सपर्ट्स के पुराने डेटा और थ्योरी के अनुसार:

“कच्चे तेल में हर 1 डॉलर प्रति बैरल की गिरावट होने पर भारत में पेट्रोल और डीजल के दामों में लगभग 50 से 55 पैसे प्रति लीटर की कटौती करने का स्कोप बनता है।”

इस हिसाब से अगर क्रूड 80 डॉलर तक आ गया है, तो तेल की कीमतों में अच्छी-खासी कटौती की पूरी गुंजाइश है।

तो क्या सच में कल से सस्ता हो जाएगा पेट्रोल?

गणित भले ही कटौती की गवाही दे, लेकिन व्यावहारिक तौर पर ऐसा तुरंत होना बहुत मुश्किल है। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  • तेल कंपनियों का घाटा और मार्जिन: सरकारी तेल कंपनियां (जैसे Indian Oil, BPCL, HPCL) पेट्रोल-डीजल के रेट्स को ‘रियल-टाइम’ क्रूड के उतार-चढ़ाव से लिंक नहीं रखतीं। जब भी क्रूड गिरता है, तो वे सबसे पहले अपना पिछला नुकसान (Under-Recovery) कवर करती हैं।
  • लंबी अवधि का ट्रेंड: कंपनियां कुछ हफ्तों या महीनों तक यह देखेंगी कि क्या क्रूड लगातार 75-80 डॉलर के नीचे टिका रहता है या नहीं। अगर कच्चा तेल लंबे समय तक सस्ता रहता है, तभी ग्राहकों को इसका फायदा मिलेगा।

असली ‘खेल’ करते हैं एक्साइज ड्यूटी और वैट (VAT)

भारत में पेट्रोल की रिटेल प्राइस का एक बहुत बड़ा हिस्सा (अक्सर 45 से 55 प्रतिशत तक) सिर्फ टैक्स (Tax) होता है। इस पूरे खेल में केंद्र की एक्साइज ड्यूटी और राज्यों का वैट निर्णायक भूमिका निभाते हैं।

  • 2020 का उदाहरण: कोरोना लॉकडाउन के दौरान जब कच्चा तेल गिरकर 20-30 डॉलर प्रति बैरल के ऐतिहासिक निचले स्तर पर आ गया था, तब थ्योरी के हिसाब से पेट्रोल 15-17 रुपये सस्ता होना चाहिए था।
  • सरकार का दांव: लेकिन सरकार ने सस्ता तेल देने के बजाय पेट्रोल पर 10 रुपये और डीजल पर 13 रुपये प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी बढ़ा दी थी। इससे खजाने में खूब पैसा आया, लेकिन जनता को कोई राहत नहीं मिली।